भारत बंद में व्यापक हिंसा, आठ की मौत, जन जीवन अस्त व्यस्त

नई दिल्ली। अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान हटाने के फैसले के विरोध में आज दलित समुदाय से जुड़े संगठनों के ‘भारत बंद’ के दौरान कई स्थानों पर हुई हिंसक घटनाओं में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गयी और पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए।

बंद के दौरान हिंसा की घटनाओं में मध्यप्रदेश में पांच, उत्तरप्रदेश में दो और राजस्थान में एक व्यक्ति की मौत हुई है। इसके अलावा कई लोग घायल हुए हैं और कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। देशभर में विभिन्न हिस्सों में दलित समाज के कई संगठनों ने फैसले का विरोध करते हुए हिंसक प्रदर्शन किये। कई स्थानों पर तोड़ फोड़, आगजनी, यातायात जाम करने, रेल पटरियां उखाड़ने तथा पुलिस के साथ झड़पें हुई।

कई शहरों में प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पडा। दलितों संगठनों के आह्वान पर आयोजित भारत बंद से जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। कुछ स्थानों पर बाजार बंद रहे और वाहन नहीं चले। उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार तथा पंजाब सहित अन्यों राज्यों में सैंकडों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

विभिन्न राज्यों में हिंसक प्रदर्शनों से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश में त्वरित कार्य बल एवं अर्द्धसैनिक बलों की चार-चार कंपनियां भेजी गयी हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार बंद और हिंसा से प्रभावित गुजरात , बिहार , राजस्थान , हरियाणा और पंजाब में स्थिति की निगरानी की जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुलिस पूरी तरह चौकस है।

उत्तर प्रदेश में स्थिति से निपटने के लिए त्वरित कार्य बल की दो कंपनी मेरठ में तथा एक – एक कंपनी हापुड़ तथा आगरा में भेजी गयी है। मध्य प्रदेश में ग्वालियर तथा भोपाल में दो – दो कंपनियां भेजी गयी हैं।

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