ई-वे बिल प्रणाली शुरू, पहले दिन जारी हुए 1.7 लाख से अधिक ई-वे बिल

नई दिल्ली। एक राज्य से दूसरे राज्य में माल परिवहन के लिए ई-वे बिल प्रणाली एक अप्रैल से शुरू हो गई है। पहले दिन 1.71 लाख से ज्यादा ई-वे बिल जारी किए गए हैं। इस प्रणाली के तहत कारोबारी अथवा ट्रासंपोर्टर को 50,000 रुपए से अधिक मूल्य का माल एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने पर जी.एस.टी. निरीक्षक के समक्ष ई-वे बिल पेश करना होगा।

वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि आज तक ई-वे बिल पोर्टल पर 10,96,905 करदाता पंजीकृत हुए हैं। इसमें 19,796 ट्रांसपोर्टरों ने खुद को ई-वे बिल पोर्टल पर पंजीकृत कराया है, जो जी.एस.टी. के अंतर्गत पंजीकृत नहीं हैं। वित्त मंत्रालय ने कहा, “एक अप्रैल 2018 को शाम 5 बजे तक पोर्टल से 1,71,503 ई-वे बिल सफलतापूर्वक जारी किए गए। वहीं, जी.एस.टी. नेटवर्क (जी.एस.टी.एन.) के अधिकारियों ने कहा कि ई-वे बिल मंच सुचारू रूप से काम रहा है और कर्नाटक ने राज्य के भीतरभी माल ढुलाई के लिए ई-वे बिल जारी किए।

कर्नाटक में सितंबर से हो रहा ई-वे बिल का इस्तेमाल: कर्नाटक एकमात्र ऐसा राज्य है जिसने राज्य के भीतर भी माल परिवहन के लिए ई-वे बिल प्रणाली को लागू किया। वह अंतर्राज्यीय माल ढुलाई के लिए पिछले साल सितंबर से ई-वे बिल मंच का इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पोर्टल की लोड क्षमता (भार वहन की क्षमता) का असली परीक्षण सोमवार से शुरू होगा क्योंकि सप्ताह के बाकी दिनों की तुलना में रविवार को कम बिल जारी हुए हैं।

एक फरवरी से शुरू होना था ई-वे बिल: माल एवं सेवा कर के ई-वे बिल प्रावधानों को इससे पहले एक फरवरी से लागू किया गया था लेकिन परमिट जारी करने वाली प्रणाली में खामिया आने के बाद इसके कार्यान्वयन पर रोक लगा दी गई। इसके बाद प्लेटफॉर्म को अधिक मजबूत बनाया गया ताकि वह बिना किसी रूकावट के प्रतिदिन 75 लाख ई-वे बिल निकाल सकें। यह प्रणाली राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एन.आई.सी.) ने डिजाइन और विकसित की है।

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