इन भारतीय क्रिकेटरों के लिए IPL है आखिरी माैका

नई दिल्ली। क्रिकेट एक एेसा खेल है जिसमें खिलाड़ी अच्छे प्रदर्शन की बदाैलत बुलंदियां भी छू सकता है, अगर फ्लाॅप साबित हुआ तो करियर खत्म भी हो सकता है। किसी खिलाड़ी को जब माैका मिलता है तो उसका उद्देश्य यही होता है कि बल्ले से रन बरसाकर या विकटें निकालकर टीम में वापसी की जाए। ऐसे में 7 अप्रैल से शुरू हो रहे आईपीएल सीजन 11 कुछ खिलाड़ियों के लिए काफी मायने रखने वाला है। अगर वो इसमें अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए तो वह संन्यास भी ले सकते हैं। आइए जानें काैन हैं वो खिलाड़ी-

1. युवराज सिंह: कभी लंबे-लंबे छक्के लगाने वाले भारतीय टीम के युवराज सिंह अब अपने प्रदर्शन को लेकर झूझते दिख रहे हैं। 36 वर्षीय युवराज ने टीम इंडिया के लिए आखिरी वनडे 30 जून 2017 को विंडीज के खिलाफ खेला था। अपनी फिटनेस आैर खराब प्रदर्शन की वजह से युवराज टीम में जगह बनाने में नाकाम रहे। अब युवराज के पास आईपीएल ही एक ऐसा माैका है जिसमें वह रनों की बरसात करके टीम में फिर से जगह बना सकें। अगर वो फ्लाॅफ रहे तो उनकी टीम में फिर से जगह बनाना मुश्किल हो जाएगा आैर उन्हें संन्यास लेना भी पड़ सकता है। किंग्स इलेवन पंजाब ने युवराज को 2 करोड़ जेकर अपनी टीम में शामिल किया है।

2. गाैतम गंभीर: ऐसा हो सकता है कि गाैतम गंभीर का यह आखिरी सीजन हो, क्योंकि उन्होंने नीलामी से पहले ही कह दिया था कि वह अपना आखिरी सीजन घर की टीम दिल्ली डेयरडेविल्स की तरफ से खेलना चाहते थे। वहीं गंभीर पिछले 5 साल से भारत की वनडे टीम से बाहर हैं। उन्होंने अपना आखिरी वनडे 27 जनवरी को इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। दिल्ली की कप्तानी करने वाले गंभीर यदि टीम को आईपीएल खिताब जीता देते हैं आैर रनों का पहाड़ खड़ा कर सकते हैं तो सकता है उन्हें विदाई मैच खेलने को मिले, वरना उन्हें भी विरेंद्र सहवाग की तरह मैदान के बाहर से ही क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ सकता है।

3. हरभजन सिंह: 37 वर्षीय भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह पिछले लगभग ढाई साल से टीम से बाहर चल रहे हैं। उन्होंने अपना आखिरी वनडे 35 अक्तूबर को 2015 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेला था। भज्जी अपनी खराब परफाॅरमेंस की वजह से टीम में वापसी नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने घरेलू मैचों में भी खास नहीं किया। वहीं इस बार चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आईपीएल खेलने वाले भज्जी के पास माैका है कि वह अपनी फिरकी आैर आॅलराउंडर प्रदर्शन से टीम चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचे, नहीं तो हो सकता है कि उनका टीम से पत्ता पक्का कट जाए, जिसकी वजह से उन्हें क्रिकेट से संन्यास लेना पड़े।

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