एबीवीपी ने किया ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव

गुलाबपुरा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रकल्प एसएफडी विकासार्थ विद्यार्थी द्वारा हर वर्ष की भांति इस बार भी सामाजिक अनुभूति कार्यक्रम किया गया। एबीवीपी जिला सहसंयोजक पीयूष मेवाड़ा ने बताया कि एबीवीपी के प्रकल्प एसएफडी द्वारा सामाजिक अनुभूति कार्यक्रम “गांव चले हम” चलाया गया। सामाजिक अनुभूति प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दो चरणों मे सम्पन्न होगी। प्रथम चरण 21 अप्रैल से 25 अप्रैल तक सम्पन्न हुआ और द्वितीय चरण 20 मई से 25 मई तक चलेगा।

एबीवीपी का मानना है कि हमारा भारत गाँवो में बसता है, हमारे गांव हमारे देश की वास्तविक तस्वीर है जिनको देखकर हम अपने जीवन का लक्ष्य तय कर सकते है। पूरी दुनिया भारत के गांवों को देखना चाहती है लेकिन हम शहर के माहौल में कंही गम होते जा रहे है। इसी को मानते हुए एबीवीपी के कार्यकर्ता हर वर्ष परीक्षा से मुक्त हुए विद्यार्थियों के साथ ग्रामीण जीवन का अनुभव करने गाँवो में गए।

इस वर्ष विद्यार्थी गाँवो की शिक्षा, कृषि, परिवहन साधन, पशुपालन, जल स्त्रोत, कुपोषण, नशाखोरी, कन्या भ्रूण हत्या, बाल मजदूरी, बाल विवाह, दहेजप्रथा, स्वच्छ्ता, जनजाति क्षेत्रो की समस्या, महिलाओ की स्तिथि, सरकारी योजनाए आदि समस्याओं का प्रत्यक्ष अनुभव किया। नगर मंत्री शौकीन कुमावत ने बताया कि इस वर्ष गुलाबपुरा नगर से कई विद्यार्थी और कार्यकर्ता गये। जो कि आने वाले समय मे डॉक्टर, इंजीनियर और विभिन्न क्षेत्रों में कुछ न कुछ बनेगे। तो वो उस ग्रामीण जीवन के लिए कुछ करने का प्रयास जरूर करेंगे।

अनुभूति 5 दिन का 1 ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव है। प्रत्येक सुबह 5-7 विद्यार्थियों का ग्रुप प्रतिदिन 2 गाँवो में गया। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने बताया कि अनुभूति कार्यक्रम में हमे गाँवो की संस्कृति से बहुत कुछ सीखने को मिला। विद्यार्थियों को बहुत सुखद अनुभव भी प्राप्त हुए तो कुछ विषयो को देखकर अत्यंत दुख भी हुआ। एबीवीपी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को कुछ समय निकाल कर अवकाश के दिनों में गाँवो में जाना चाहिए। सामाजिक अनुभूति कार्यक्रम में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के साथ विद्यार्थियों ने भी ग्रामीण जीवन का अनुभव किया।

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