आईपीएस रहते हुए आईएएस बने सुराणा

अभिषेक की आल इंडिया में 10वीं व राजस्थान में पहली रैंक
बिजयनगर। इस वर्ष यूपीएससी में क्षेत्र की युवा प्रतिभा ने लोहा मनवाया है। निकटवर्ती कंवलियास (भीलवाड़ा) निवासी अभिषेक सुराणा ने प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में सफलता हासिल की है। सुराणा ने यह उपलब्धि आईपीएस रहते हुए हासिल की है। सुराणा ने आल इंडिया में 10वीं रैंक और राजस्थान में पहली रैंक हासिल किया है। आईआईटी बीटेक सुराणा ने इससे पूर्व कई मल्टीनेशनल कम्पनियों में अपनी सेवा दे चुके हैं। सुराणा ने स्कूली शिक्षा भीलवाड़ा में सेंट्रल एकेडमी (सीबीएसई) स्कूल से पूरी की। उसके बाद दिल्ली में आईआईटी कॉलेज से बीटेक किया। प्रस्तुत है खारीतट संदेश से अभिषेक सुराणा की विशेष बातचीत।

सबसे पहले आपको बधाई। अपने बारे में कुछ बताएं?
आईआईटी कॉलेज में बीटेक करते हुए मैंने अपने नाम पर दो कम्पनियां बनाई (1) सोलर (2) रोबोटिक्स। उसके जरिए मैंने एनजीओ की तरह कार्य भी किया। बीटेक होने के बाद मैंने ब्राकलेस फाईनेंस नाम की कम्पनी में डेढ़ वर्ष तक जॉब किया, उस कम्पनी में 60 लाख से ज्यादा का पैकेज था। उसके बाद एक कम्पनी के प्रोजेक्ट के तौर पर 10 माह तक साउथ अमेरिका में कार्य किया। उस प्रोजेक्ट के खत्म होने से पहले ही मैंने ऑनलाईन आईएएस की परीक्षा के लिए 2015 में आवेदन कर दिया था। परीक्षा दी लेकिन तैयारी करने का पूरा समय नहीं मिला, इसलिए सफलता नहीं मिली।

फिर क्या हुआ? फिर कैसे तैयारी की?
फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी और पुन: 2016 में फार्म भरा और इस बार सफल हो गया। इस परीक्षा के परिणाम में मुझे भारतीय वन सेवा में आल इंडिया सैकण्ड रैंक बनी। मुझे मध्यप्रदेश में पोस्टिंग मिली। इस क्रम में मैंने इसी वर्ष भारतीय प्रशासनिक पद के लिए भी आवेदन किया हुआ था, उसमें मुझे ऑल इंडिया लेेवल पर 250वीं रैंक मिली। इसके आधार पर मुझे आईपीएस का पोस्ट मिला और पश्चिम बंगाल में पोस्टिंग मिली और वर्तमान में भारतीय पुलिस एकेडमी हैदराबाद में दिसम्बर 2017 से ट्रेनिंग में हूं। ट्रेनिंग में आने से पहले आईएएस का एग्जाम देकर आया जिसके तहत फरवरी 2018 में इंटरव्यू हुए जिसके आधार पर अभी हाल ही में मेरी ऑल इंडिया लेवल में 10वीं रैंक और राजस्थान में पहली रैंक बनी है।

अच्छा पैकेज था, फिर आईपीएस बने। आईएएस बनने की प्रेरणा कहां मिली?
मुझे आईएएस बनने की प्रेरणा मेरे दादाजी स्व. मूलचन्दजी सुराणा से मिली। उनका सपना था कि मैं कलेक्टर बनूं। इसके लिए उन्होंने मुझे बचपन में अपने दोस्त और राजस्थान के तत्कालीन मुख्य सचिव चित्तौडग़ढ़ निवासी मिठालालजी मेहता का उदाहरण देते थे। वे चाहते थे कि उनका पोता दुनिया में नाम कमाए। बस मैंने भी उसी समय से अपना लक्ष्य निर्धारित करते हुए आईएएस बनने की ठान ली।

जॉब के दौरान कहां-कहां कार्य किए?
मैं भारत के बाहर करीब 20 से अधिक देशों में घूम चुका हूं। इन सबके बाद मुझे यह महसूस हुआ कि क्यों न मैं अपनी प्रतिभा का उपयोग देश हित के लिए करूं। तभी मैंने दृढ़़निश्चय किया कि प्रशासनिक पद पर रहकर अपने देश की अच्छे से सेवा की जा सकती है।

आईएएस की तैयारी किस तरह की?
आईएएस परीक्षा की तैयारी मैंने बिना किसी कोचिंग क्लासेज के अपने स्तर शुरू कर दी। मैंने स्टडी मटेरियल कलेक्ट कर तैयारी करने में जुट गया। मेरे दादाजी और बड़े बुजुर्गों का ही आशीर्वाद है कि मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हुआ।

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