हम हैं रक्तदान में अव्वल

बिजयनगर में सामाजिक सरोकार से जुड़ी संस्थाएं तन-मन-धन से धार्मिक व सामाजिक कार्यों को बखूबी अंजाम देती हैं। इसी तरह किसी की जिंदगी बचाने के लिए भी शहर की सामाजिक संस्थाएं सक्रिय रहती हैं। रक्तदान के लिए आए दिन शिविर लगाए जाते हैं। इन शिविरों में सैकड़ों यूनिट रक्त संग्रह किया जाता है। यही संग्रहित रक्त किसी की जीवन में सांसों की डोर को टूटने नहीं देतीं।

बिजयनगर में दानदाताओं की कोई कमी नहीं। कोई खुलेहाथ से धन दान करते हैं तो कुछ लोग किसी की जीवन को बचाने के लिए रक्तदान करते हैं। यह उपलब्धि कम नहीं है कि शहर में प्रति वर्ष लगभग औसतन तीन हजार यूनिट रक्त संग्रह किए जाते हैं। जागरूकता इतनी है कि अब दंपत्ति जोड़े से शिविरों में उत्साह के साथ रक्तदान करने पहुंचते हैं। बिजयनगर के रक्तदाताओं के जुनून और उत्साह पर खारीतट संदेश की यह विशेष रिपोर्ट….

‘जीते जी रक्तदान मरणोपरांत नेत्रदान’
‘जीते जी रक्तदान मरणोपरांत नेत्रदान’ हमारे क्लब का यही मुख्य ध्येय है। इसके तहत रक्तदान शिविर, नेत्र जांच शिविर, शल्य चिकित्सा शिविरों का आयोजन लायंस क्लब बिजयनगर करता आ रहा है। क्लब के स्थापना दिवस 20 दिसम्बर को विभिन्न शिविर का आयोजन होता है। क्लब जागरूकता का प्रयास कर रहा है।


-डॉ. श्यामसुन्दर अग्रवाल, लायंस क्लब बिजयनगर (जोन चेयरमैन, रीजन थर्ड, जोन सैकण्ड, प्रांत 3233-ई2)

अब तक 55 बार रक्तदान
मैंने अभी तक 55 बार स्वेच्छा से रक्तदान किया है। जब लायंस क्लब बिजयनगर की स्थापना हुई, तब हमने शिविर में 11 यूनिट रक्त संग्रह किया जाता था। प्रचार-प्रसार के बाद अन्य सामाजिक व स्वयंसेवी संगठनों ने भी शिविर लगाने शुरू किए। इसके बाद से यह सिलसिला चल पड़ा।


-राजकुमार लुणावत, पूर्व अध्यक्ष, लायंस क्लब बिजयनगर

ब्लड बैंक में आसानी से मिल जाता है रक्त
जब हमें किसी भी ग्रुप के रक्त की जरूरत हो तो उसी ग्रुप का रक्त हमें आसानी से ब्लड बैंक में मिल जाता ताकि किसी को परेशानी नहीं हो। भीलवाड़ा शहर की एक बात बिल्कुल नई है वो यह है कि भीलवाड़ा शहर की जितनी भी स्वयंसेवी संस्थाऐं या फिर ब्लड बैंक में जो रक्तदान होता है उसका 80 प्रतिशत रक्तदान स्वेच्छा से होता हैं। और भीलवाड़ा शहर में सालभर में करीबन 150 ब्लड डोनेशन के कैम्प लगते हैं।


रामनारायण लढ़ा, प्रभारी रामस्नेही ब्लड एवं कम्पोनेंट बैंक, भीलवाड़ा

महिलाओं को भी करना चाहिए रक्तदान
मैं स्वयं 50 बार से भी ज्यादा रक्तदान कर चुका हूं। जोड़े सहित 3 बार रक्तदान किया है। जोड़े सहित रक्तदान करना कोई भावनात्मक कारण नहीं रहा बल्कि लोगों के यह संदेश देने की मंशा रही कि महिलाओं को भी पुरुषोंं की भांति रक्तदान करना चाहिए।

राजकुमार बिंदल, पूर्व सचिव, लायंस क्लब बिजयनगर

सुरक्षित रखते हैं रक्त
रक्त संग्रहण का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि ब्लड बैंक में सभी ग्रुप के ब्लड सुरक्षित होते हैं, जरूरत पडऩे पर जिस किसी भी ग्रुप का रक्त चाहिए तो आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

-गंगासिंह शेखावत, ब्लड बैंक काउंसलर, जेएलएन

ऐसे मिली प्रेरणा
एक वाकया मुझे याद है कि भीलवाड़ा में एक डाक्टर साहब थे उनको ब्लड की सख्त जरूरत थी लेकिन समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी ने भीलवाड़ा में धारीवाल ब्लड बैंक की स्थापना की। हम भी उनसे मिले और हमने भी हमारे आस-पास ब्लड़ की कमी से होने वाली परेशानी को समझा और शिविर लगाकर रक्त संग्रहित करने का निश्चय किया। इसी क्रम में प्रथम बार हमने जैन सोश्यल ग्रुप के सौजन्य से रक्तदान शिविर लगाकर रक्त संग्रहित किया और भीलवाड़ा, अजमेर और जयपुर के अस्पतालों में संग्रहित रक्त ब्लड बैंक में भिजवाया।


दिलीप तातेड़, कोषाध्यक्ष, श्री पीकेवी चिकित्सालय, बिजयनगर

… ताकि पीडि़त व्यक्ति की जान बचाई जा सके…
मैं स्वयं 15 बार रक्तदान कर चुका हूं और सपत्नीक 10 बार रक्तदान किया है। जोड़े से रक्तदान करना सिर्फ यही संदेश देता है कि चाहे पुरुष हो या महिला, रक्तदान सभी को करना चाहिए। अपने द्वारा किए गए रक्तदान से किसी पीडि़त व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।

हेमंत अग्रवाल, पूर्व कोषाध्यक्ष, लायंस क्लब, बिजयनगर

… और भी फायदे हैं रक्तदान के
जोड़े से रक्तदान इसलिए करते हैं कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति की रक्त मिलने पर जरूरत पूरी हो और किसी की जान बच सके। सपत्निक रक्तदान कर यही संदेश देना चाहते है कि महिलाओं को भी रक्तदान करना चाहिए अभी तक महिलाओं में रक्तदान को लेकर कोई खास जागरूकता नहीं है। रक्तदान से पहले मेरी पत्नी को ब्लड प्रेशर और हिमोग्लोबीन कम होने की शिकायत थी, लेकिन रक्तदान करने के बाद सब कुछ सामान्य है।


-अनिल नाबेड़ा, पूर्व सचिव, जैन सोश्यल ग्रुप, बिजयनगर

प्रति वर्ष चार बार करता हूं रक्तदान
हमारे एक रिश्तेदार को छह वर्ष पूर्व हेपेटाइटिस की समस्या थी। उस समय उनके लिए कहीं से भी खून का इंतजाम नहीं हो पाया, हो पाया और अंत में उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना से प्रेरणा लेते हुए मैंने रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करना शुरू किया और मैं उसी घटना के बाद से प्रतिवर्ष 4 बार रक्तदान करता हूं। भारत विकास परिषद के सौजन्य से रक्तदान शिविर लगवाता हूं। अन्य संगठनों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाता है।


अमिताभ सनाढ्य, खण्ड कोषाध्यक्ष, राजस्थान ब्राह्मण महासभा, मसूदा

… बढ़ती गई रक्तदान करने वालों की संख्या
एक घटना अच्छे से याद है कि एक बार जहाजपुर से एक व्यक्ति का फोन आया और उन्होंने रामस्नेही अस्पताल में ब्लड उपलब्ध करवाने की मांग की। मैंने काफी प्रयास किए लेकिन ब्लड की व्यवस्था नहीं बैठ पाई। ब्लड होने की जानकारी जुटाने के दौरान एक व्यक्ति ने मुझे बताया कि अगर आपको रक्त की जरूरत है तो किसी व्यक्ति का प्रबंध कीजिए, जो अपने शरीर से एक यूनिट रक्तदान कर सके। तब मैंने भारत विकास परिषद के सौजन्य से रक्तदान शिविर लगवाने की शुरुआत की। प्रथम रक्तदान शिविर के लिए हमने लोगों से सम्पर्क कर नाम और मोबाईल नम्बर लिखे तब हमने 200 से भी ज्यादा लोगों के नाम लिखे, लेकिन जिस दिन कैम्प लगा उस दिन सिर्फ 6 जने ही रक्तदान करने आए। फिर रक्तदान करने वाले लोगों की संख्या बढ़ती गई।


दिनेश कोगटा, प्रांतीय अध्यक्ष, मध्य प्रांत भारत विकास परिषद

आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में पीडि़त व्यक्ति खून की कमी के कारण अपनी जान गंवा देते थे। रक्त संग्रह कर लोगों की जान बचाने की मुहिम छेड़ी गई। उसी क्रम में बिजयनगर सहित आस-पास के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों द्वारा आए दिन रक्तदान शिविर लगाए जा रहे हैं। रक्तदान के प्रति लायंस क्लब रॉयल सहित सभी स्वयंंसेवी संस्थाएं रक्तदान को लेकर लोगों में जागरूकता लाने का प्रयास कर रही है।


देवेन्द्र रांका, अध्यक्ष लायंस क्लब ‘रॉयल’, बिजयनगर

सभी को करना चाहिए रक्तदान
गुरुदेव के निर्वाण दिवस पर स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रयास से 2016 से लगातार हर वर्ष 22 अप्रेल को रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर में संग्रहित रक्त भीलवाड़ा व अजमेर के ब्लड बैंकों में भेजा जाता है। सभी को रक्तदान अवश्य करना चाहिए।

सुश्री कृष्णा टांक, ट्रस्टी बाड़ी माता मंदिर ट्रस्ट, बाड़ी

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