प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के दिए दिशा-निर्देश

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जयपुर। (वार्ता) राजस्थान सरकार ने एक परिपत्र जारी कर आगामी दक्षिण पश्चिमी मानसून के दौरान किसी भी संभावित अतिवृष्टि, बाढ़ एवं प्राकृतिक आपदा की स्थिति में जनधन की सुरक्षा के उपाय के लिए सम्बन्धित विभागों को उचित प्रबन्ध करने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबन्धन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मौसम विभाग द्वारा एक स्थाई नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा। विभाग द्वारा मानसून की गतिविधियों की नियमित जानकारी जिला कलक्टर, आपदा प्रबन्धन एवं सहायता विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।

इसी प्रकार सिंचाई विभाग द्वारा 15 जून से बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा। विभाग द्वारा वायरलैस सेटों, नावों, रक्षा पेटियों, रस्सों, मशालों तथा टॉर्च आदि की समुचित व्यवस्था की जाएगी। वर्षा के दौरान विभाग द्वारा नदियों, नहरों, बांधों, तालाबों पर नियंत्रण भ्रमण कर संकट के विषय में अग्रिम चेतावनी देने का काम भी किया जाएगा।  जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा भी नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा तथा निचले क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए पम्प सैटों की व्यवस्था के साथ ही स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाएगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा उचित मूल्य की दूकानों पर गेहूं, कैरोसीन, अन्य खाद्य सामग्री के भण्डारण और वितरण की व्यवस्था की जाएगी।

स्थानीय निकाय विभाग द्वारा भी नियंत्रण कक्ष स्थापित कर शहर की सड़कों की मरम्मत तथा नालों की सफाई व्यवस्था पन्द्रह जून से पहले करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी प्रकार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जीवन रक्षक दवाइयों तथा मोबाइल चिकित्सा दल के गठन की व्यवस्था भी की जाएगी।  परिपत्र के अनुसार भारत संचार निगम तथा डाक एवं तार विभाग द्वारा भी आपात की स्थिति में संचार व्यवस्था अबाधित रखने की व्यवस्था की जाएगी। इसी प्रकार इस दौरान पुलिस विभाग द्वारा नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा। पर्याप्त मात्रा में तैराक, गोताखोरों तथा नावों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके अतिरिक्त होमगार्ड एवं आरएसी की प्रशिक्षित तथा अन्य कम्पनियां तैयार रखी जाएगी।

बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राज्य आपदा मोचन बल में आठ सौ कार्मिकों की भर्ती की गई है। आपदा के समय इनके द्वारा प्रशिक्षित टीम आवश्यक उपकरण तथा त्वरित आवागमन के लिए संसाधन के लिए व्यवस्था की जाएगी। राज्य आपदा प्रतिसाद बल को आठ कम्पनियों में विभाजित कर समस्त संभाग मुख्यालयों में नियोजित किया गया है। विद्युत वितरण निगम द्वारा विद्युत व्यवस्था को सुचारू रखने, जमीन पर पड़े ट्रांसफार्मरों को डीपी पर रखवाने तथा ढीले तारों को कसने का काम किया जाएगा।

जिला आपदा प्रबन्धन प्रकोष्ठ द्वारा सेना एवं वायुसेना के साथ सामंजस्य स्थापित किया जाएगा तथा संभावित खतरे वाले स्थानों का दौरा भी किया जाएगा। पशुपालन विभाग द्वारा बाढ़ के समय पशुओं में फैलने वाली बीमारियों के इलाज के लिए दवाइयों की व्यवस्था, चारे-पानी की व्यवस्था तथा मृत पशुओं के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था भी की जाएगी। इस दौरान सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा। विभाग द्वारा पुराने भवनों की पहचान तथा मरम्मत, संभावित खतरों वाले रपट, पुलियाओं पर लोहे की जंजीरों की व्यवस्था की जाएगी।

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