शरीर नश्वर, नहीं करें व्यर्थ गुमान

क्षेत्रों में श्रद्धा व धर्म की बयार बह रही है। पुरुषोत्तम मास अर्थात अधिक मास (मलमास) शुरू हो चुका है। पवित्र पाक का महीना रमजान आज से शुरू हो जाएगा। मंदिरों में भजन-कीर्तन गुंजेगे तो वहीं मस्जिदों में रमजान का अजान गुंजेगी। पुरुषोत्तम मास व रमजान के बाद चातुर्मास शुरू हो जाएगा। अर्थात अगले पांच महीने तक पूरा वातावरण धर्ममय रहेगा…

बिजयनगर। मानव शरीर नश्वर है अत: इस पर किसी को व्यर्थ गुमान नहीं करना चाहिए। यह बात स्वामी सत्यानन्द महाराज ने कही। महाराज बुधवार को श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में व्यास पीठ से बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कोई भी चीज हो उसका महत्व तभी तक रहता है जब तक कि वह उसके उपयुक्त स्थान पर है। उन्होंने कहा कि जैसे सिर पर बाल होते हैं तो वह सुन्दर लगते हैं लेकिन जब नाई उन्हें काटकर शरीर से अलग कर देता है तो वह कचरे में तब्दील हो जाते हैं।

इसी प्रकार जब भोजन बनाने वाली गृहणी का बाल भोजन में गिर जाता है तो वह भोजन भी अपवित्र होकर उदरपूर्ति के लायक नहीं रह पाता है। इसी तरह दांत मुंह में हो तो सुन्दर है और वही दांत गिर जाए तो उसे जल्दी से फेंका जाता है। मनुष्य के शरीर में खून जब तक है तो उसे वह स्वस्थ रखता है और अच्छा लगता है लेकिन शरीर के किसी भाग में मामूली चीरा लग जाने पर वही खून अगर घर के आंगन में गिरता है तो वह बुरा लगता है और तुरन्त उसकी सफाई कर दी जाती है। इसीलिए भागवत कथा में कहा गया है कि शरीर चाहे बलिष्ठ हो चाहे सुन्दर हो, किसी भी कीमत में इस पर गुमान नहीं करना चाहिए।

शरीर में से आत्मा निकलते ही यह नश्वर हो जाता है। महाराज ने अपने व्याख्यान में श्रद्धाभाव पर भी व्याख्यान देते हुए कहा कि संत-मुनियों को भी यह अधिकार नहीं है कि वे किसी श्रद्धालु की श्रद्धा का चोट पहुंचाए। उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि आज मैं आपके सामने श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करके आपकी श्रद्धा बटोर रहा हूं। यदि मैं आपको किसी सिनेमा घर में फिल्म देखते हुए पाया गया तो आपकी श्रद्धा को आघात पहुंचेगा।

इसीलिए कहा गया है कि आम आदमी हो या संत व मुनि, उन्हें अपनी मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। मर्यादा का उल्लंघन होने पर श्रद्धाभाव को चोट पहुंचती है। इससे पूर्व सत्यानन्द महाराज के सान्निध्य में सुबह 10 बजे श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर परिसर से श्रीमद्भागवत गीता की शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा कस्बे के मुख्य मार्गों से होती हुई श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर पहुंचकर सम्पन्न हुई।

शोभायात्रा में मदनगोपाल बाल्दी, बनवारीलाल कोगटा, गिरधर आगीवाल, कैलाश पारीक, गोविन्द आगीवाल, शिवप्रसाद झंवर, राजेन्द्र शर्मा, कंवरलाल खण्डेलवाल, रामलक्ष्मण लखोटिया, प्रकाश गुप्ता, प्रमोद जागेटिया, पूनमचन्द शर्मा, शेरसिंह राठौड़ सहित श्रद्धालु मौजूद थे।
दूसरी ओर बालाजी मन्दिर में दाधीच परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्री उमेशचन्द महाराज ने व्यास पीठ से बोलते हुए कथा के बारे में बताया। इससे पूर्व श्री उमेशचन्द महाराज के सान्निध्य में सुबह 9 बजे श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर से श्रीमद्भागवत गीता की शोभायात्रा निकाली गई। जो बालाजी मन्दिर, सब्जी मण्डी, सथाना बाजार होते हुए बजरंग कॉलोनी बालाजी मन्दिर पहुंची।

शोभायात्रा में ओमप्रकाश शर्मा, विष्णुदत्त, वासुदेव, राजेन्द्रकुमार, राकेशकुमार, कमलेशकुमार, लोकेशकुमार सहित आयोजक दाधीच परिवार व समाज के नौरतमल त्रिपाठी, नवीन शर्मा, अर्जुनरामजी महाराज (जोधपुर), राधाकिशन सोनी, मंगलप्रसाद चौहान, विद्याधर शर्मा, महावीर शास्त्री, अरविन्द ओझा, गोर्वधनलाल टेलर सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।

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