पंजाब की चीनी मील का प्रदूषित पानी इंदिरा गांधी नहर में छोड़ा

बीकानेर। (वार्ता) पंजाब के बटाला क्षेत्र में स्थित एक चीनी मिल द्वारा हजारों टन शीरा व्यास नदी में बहाये जाने से प्रदूषित हुई इंदिरा गांधी नहर के पानी को आज बीकानेर जिले के खाजूवाला क्षेत्र में एक झील में छोड़ा गया। सूत्रों ने बताया कि इससे पहले इस झील के आसपास की ढाणियां, चकों, एवं डेरे को लोगों और उनके मवेशियों को इस प्रदूषित पानी के सेवन से बचाने के लिये उनसे इलाका खाली करवा लिया गया। इस प्रदूषित पानी के सेवन से गंगानगर जिले के पदमपुर में एक दर्जन भेड़ों की मौत हो चुकी है। आज भी खाजूवाला के खरबारा इलाके में एक दर्जन भेड़ों के मारे जाने की सूचना है।

सूत्रों ने बताया कि इससे पहले आरडी 507 हैड से करीब 70 किलामीटर पीछे गंगानगर जिले के सूरतगढ़ उपखण्ड में स्थित बिरधवाल हैड से इसमें पानी बंद कर दिया गया। यह पानी प्रदूषित है और काला पड़ गया है। इस पानी को जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों के सामने झील में छोड़ने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा। दूसरी ओर बिरधवाल हैड में नहर के दूसरी तरफ भी करीब 15 किलोमीटर तक पानी प्रदूषित है। इस पानी को बिरधवाल हैड से अनूपगढ़ शाखा तथा टिब्बों में छोड़े जाने की सम्भावना है। जलसंसाधन विभाग के सूत्रों का कहना है कि इन्दिरा नहर को इसी तरह से प्रदूषित पानी से मुक्त किया जा सकता है।

विभागीय सूत्रों ने बताया कि घेघड़ा झील में कईं वर्ष पहले तब पानी छोड़ा गया था, जब इस इलाके में बादल फटने से इन्दिरा गांधी नहर टूट गई थी। इसके बाद से यह झील सूखी पड़ी है। इसमें लोग अवैध रूप से काश्त करते हैं। चरवाहे अपने मवेशियों को चराने के लिए ले आते हैं। चरवाहों ने आसपास ही डेरे डाले हुए हैं। झील के आसपास कईं ढाणियां एवं चक हैं। लोगों को इस पानी का उपयेाग नहीं करने का अनुरोध किया जा रहा है।

व्यास नदी में जहरीला शीरा छोड़े जाने का मुद्दा काफी गरमा गया है। व्यास नदी में इससे लाखों जलीय जीव दम तोड़ चुके है। व्यास नदी से यह पानी इंदिरा गांधी नहर में आता है। इंदिरा गांधी नहर पश्चिमी राजस्थान की जीवनदायिनी है। करीब एक महीने की नहरबंदी का सामना कर चुके बीकानेर, गंगानगर और हनुमानगढ़ के लोग अचानक आई इस विपदा से काफी उद्वेलित हैं। यह मामला इतना जोर पकड़ गया कि केंद्र सरकार को इसमें दखल देना पड़ा। इसके बाद पंजाब सरकार ने इस मामले में बटाला की चड्ढा चीनी मिल पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

पंजाब का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसकी अलग से जांच कर रहा है। उधर, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में भी एक याचिका दायर की गयी है, जिसे गंभीरता से लेते हुए ट्रिब्यूनल ने केन्द्र सरकार, पंजाब और राजस्थान सरकार सहित 12 लोगों को प्रतिवादी बनाते हुए नोटिस जारी किये हैं। ट्रिब्यूनल ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सतलुज एवं व्यास नदियों सहित पश्चिमी राजस्थान की नहरों के पानी के नमूने लेकर छह सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है। पश्चिमी राजस्थान के करीब एक दर्जन जिलों के लोगों को इस प्रदूषित पानी की वजह से पेयजल एवं किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाया।

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