राजस्थान में निपाह वायरस के संबंध में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश

  • Devendra
  • 26/05/2018
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जयपुर। (वार्ता) राजस्थान में निपाह वायरस के संबंध में विशेष सर्तकर्ता बरतने के निर्देश दिये गये हैं। मुख्य सचिव डी बी गुप्ता की अध्यक्षता में आज यहां इस संबंध में बैठक आयोजित की गयी। बैठक में चिकित्सा विभाग द्वारा बताया गया कि अब तक प्रदेश में निपाह वायरस से पीड़ित एक भी व्यक्ति सामने नहीं आया है। इस मौके श्री गुप्ता ने चिकित्सा विभाग द्वारा निपाह वायरस के प्रति विशेष सर्तकर्ता बरतने एवं इसके बारे में आमजन को सही सूचना उपलब्ध कराने के साथ ही पूर्ण सक्रियता बरतने पर बल दिया।

उन्होंने सभी राजकीय चिकित्सा संस्थानों में वायरस के बारे में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही जांच की समुचित व्यवस्था एवं उपचार में आवश्यक दवाइयां आदि सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिये। इस समय केरल राज्य के उत्तरी जिलों मल्लापुरम एवं कोजिकोड में निपाह रोग का संक्रमण प्रभावी है इसलिए इन जिलों में इस समय यात्रा पर जाने से बचना चाहिए।

अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा-स्वास्थ्य वीनू गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशकों तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस के बारे में दिशा-निर्देश जारी किये जा चुके हैं एवं उनके स्वयं के स्तर पर निपाह वायरस के बारे में दैनिक माॅनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि आमजन को इस बीमारी से घबराने की आवश्यकता नहीं है। सभी राजकीय चिकित्सालयों में निपाह वायरस के बारे में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही इलाज के लिए जरुरी प्रबंध किये जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य एवं जिला स्तर पर भी रेपिड रेसपोंस टीमों को भी सतर्क किया जा गया है। उन्होंने कहा कि रोग ग्रस्त इलाकों में यात्रा से लौटे लोगों को मस्तिष्क ज्वर अथवा सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या के लक्षण होने पर तत्काल चिकित्सालय में सम्पर्क करना चाहिए।

निदेशक (जनस्वास्थ्य) डाॅ. वी के माथुर ने बताया कि निपाह वायरस एक जुनोटिक (पशुजन्य) बीमारी है और यह वायरस मनुष्यों का सम्पर्क निपाह संक्रमित सूअर, चमगादड़ या संक्रमित रोगी के साथ होने पर अथवा संक्रमित कच्चे खजूर या खजूर के रस के सेवन से फैलता है। उन्होंने बताया कि इसके संक्रमण के मुख्य लक्षण में बुखार होना, सरदर्द, सांस लेने में तकलीफ, दिमाग में सूजन, खांसी, उल्टी होना, मांसपेशियों में दर्द, मानसिक भ्रम, दस्त एवं ऐंठन होना आदि होता है।

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