नकेल कसना जरूरी

नगर पालिका प्रशासन की ओर से जारी नोटिस को ‘चूरन की पर्ची’ समझ नियम-कायदों को ताक पर रखने वालों पर नकेल कसना जरूरी है। बिजयनगर की जनता को उम्मीद है कि नगर पालिका अध्यक्ष इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करेंगे।

बिजयनगर नगर पालिका में कुछ भी असंभव नहीं, और सब कुछ संभव है। आलम यह है कि नगर पालिका प्रशासन की आंखों पर पट्टी साल-दर-साल मोटी होती जा रही है। नजर के सामने नियम-कायदों को ताक पर रख कर बहुत कुछ हो रहा है, पर नगर पालिका प्रशासन की तंद्रा टूट नहीं रही। नगर पालिका प्रशासन के रोक के बावजूद शहर के मेनरोड पर भवन निर्माण कार्य ‘युद्धस्तर’ पर जारी है। ऐसा नहीं है इससे नगर पालिका प्रशासन पूरी तरह अनजान है।

यदि नगर पालिका प्रशासन वाकई इससे अनजान है तो और भी अधिक ‘चिंता’ की बात है। … और यदि नगर पालिका प्रशासन भवन निर्माण की जानकारी होने के बावजूद हाथ पर हाथ धरे बैठा है तो यह ‘अफसोसजनक’ है। नियम-कायदों को ताक पर रख कर न केवल भवन निर्माण कर दिया गया बल्कि नियम विरुद्ध तलघर का भी निर्माण करा दिया गया। इसके बावजूद नीरो के चरित्र को चरितार्थ करने वाला बिजयनगर नगर पालिका प्रशासन मौन है। (कहावत है कि जब रोम जल रहा था तो नीरो बांसुरी बजा रहा था) नीरो के बांसुरी बजाने वाला मुहावरा बिजयनगर नगर पालिका प्रशासन के लिए भी सौ-फीसदी फिट बैठता है।

इस घटना के कई पहलू हैं। क्या तलघर से लेकर तीसरी मंजिल के निर्माण तक नगर पालिका प्रशासन को कोई जानकारी नहीं मिली? क्या नगर पालिका प्रशासन महज खानापूर्ति के लिए ही नोटिस जारी करता है? या फिर नगर पालिका के नोटिस का आम लोगों पर कोई असर नहीं होता? ये तमाम तरह के सवाल मौजूं हैं जिनके जवाब नगर पालिका प्रशासन को देर-सबेर देना ही होगा। इतना तो तय है कि बिना प्रश्रय और वरदहस्त के नगर पालिका प्रशासन के रोक के बावजूद तलघर सहित तीन मंजिले भवन का निर्माण नहीं हो सकता। अगर ऐसा नहीं है तो नोटिस को चूरन की पर्ची समझ नियम-कायदों को ताक में रख भवन निर्माण करने वाले पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। ताकि नोटिस के तामील में फिर कोई भी व्यक्ति इस तरह की हिमाकत नहीं कर सके।

नगर पालिका प्रशासन को भी अपने सुस्त रवैये में बदलाव लाना होगा। वर्ना नगर पालिका प्रशासन के नोटिस का असर और अस्तित्व धीरे-धीरे विलीन होता जाएगा। इस पूरे खेल में यदि कुसूरवार को सजा मिले तो लापरवाही बरतने वाले बिजयनगर नगर पालिका के अधिकारियों व कर्मचारियों को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए। बिजयनगर नगर पालिका की सत्ता पर काबिज सदन के नेता और नेता प्रतिपक्ष से बिजयनगर की जनता को अब ‘इंसाफ’ चाहिए। सदन के नेता होने के नाते नगर पालिका अध्यक्ष सचिन सांखला को इस पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यही वक्त और इंसाफ का तकाजा है। नगर पालिका प्रशासन की ओर से जारी नोटिस को ‘चूरन की पर्ची’ समझ नियम-कायदों को ताक पर रखने वालों पर नकेल कसना जरूरी है। बिजयनगर की जनता को उम्मीद है कि नगर पालिका अध्यक्ष इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करेंगे।

जय एस. चौहान

Leave a Reply

Your email address will not be published.

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Skip to toolbar