किसानों का गांव बंद आंदोलन शुरू

जयपुर। (वार्ता) किसान संगठनों द्वारा स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने तथा आमदनी बढाने के लिये आज से शुरू हुये दस दिवसीय राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत राजस्थान में भी किसानों ने नाकेबंदी कर गांव बंद आंदोलन शुरू कर दिया। राजस्थान के गंगानगर में आंदोलन का सर्वाधिक असर हुआ है जहां किसानों ने गांव के बाहर नाके लगाकर फल सब्जियों की अस्थायी दुकानें लगाकर खुद बेच रहे है वहीं राजधानी जयपुर के शाहपुरा में वाजिब दाम नही मिलने से खफा किसानों ने सडकों पर दूध बिखेर दिया।

गंगानगर में किसान पदमपुर रोड, अबोहर बाईपास, हनुमानगढ़ रोड समेत सभी मार्गों पर अपने उत्पादों को बेचने के लिए बैठे हैं। किसानों ने सब्जियों के मूल्य भी तय कर रखे हैं, जो सभी स्टालों पर एक जैसे ही है और यह आम दिनों के मूल्य के समान है। किसानों के गांव बंद का असर पहले दिन ही होने लगा है। आंदोलन के कारण शहरों में सब्जियों की आवक नहीं होने से शहर क्षेत्रों में सब्जी मंडियों पर बुरा असर पडा है। हालांकि सब्जी मंडियों में ताजा सब्जियों के साथ ही कल की बची सब्जियों काे बेचा जा रहा है।

शहर में मंडी तो खुली, लेकिन कोई भी किसान सब्जी मंडी में अपने उत्पादन को नहीं बेच रहा है। इसलिए सिर्फ वही सब्जियां बाजार में बिकती नजर आयी जिसका स्टॉक मौजूद है। मंडियों में सब्जियां नहीं आने से दाम भी काफी बढ गये हैं जिससे आम उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हो रही है। जयपुर के पास शाहपुरा में गांव बंद के समर्थन में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। यहां किसानों ने सब्जी और दूध सड़क पर बिखेरकर विरोध जताया। इस दौरान कई कांग्रेसी कार्यकर्ता भी वहां मौजूद थे।

किसानों के आंदोलन को देखते हुये जिला प्रशासन ने भी एहतियाती उपाय किये है और गांव के बाहर बनाये गये नाकों पर किसी भी अप्रिय स्थिति को टालने के लिये कडी निगरानी रखे हुये है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में किसानों के पचास हजार रूपये तक के सहकारी रिणों की माफी के प्रमाण पत्र वितरित करने की शुरूआत कल ही बांसवाडा में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा की गयी है लेकिन इसके बावजूद किसान आंदोलन कर रहे हैं।

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