रमजान का तीसरा अशरा आज से

बिजयनगर। मुस्लिम समुदाय में बुधवार को बीसवां रोजा पूरा होने के साथ ही दूसरा अशरा मगफिरत का पूरा हो गया। दरअसल मगफिरत (मोक्ष) के अशरे (कालखंड) की आखिऱी कड़ी पूरी हुई है। गुरुवार 7 जून से तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का शुरू होगा। 10 दिनों तक लोग मस्जिद में बैठकर लगातार क्षेत्र में अमन चैन व खुशहाली के लिए इबादत करेंगे। 8 जून को रमजान का चौथा चुनाव जुम्मा है। ग्यारहवें रोजे से शुरू होकर बीसवें रोजे तक की बीच के दस दिनों की रोजादार की परहेजगारी, इबादत, तिलावते-कुरआन (कुरआन का पठन-पाठन) और तकवा (पवित्र आचरण) के साथ अल्लाह की फर्मांबरदारी (आदेश मानना) ही मगफिरत (मोक्ष) की रोशनी का मुस्तहिक (अधिकारी/पात्र) बनाती है। रोजा सब्र का प्याला और मगफिक्तरत का उजाला है।

रमजान के तीन कालखंड पहला रहमतों का दूसरा मगफिरत का तीसरा जहन्नम से आजादी रमजानुल मुबारक का पहला अशरा (दस दिन) रहमतों का, दूसरा अशरा मगफिरत का और तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का है। इस पाक महीने में अल्लाह एक नेकी का सवाब 70 नेकियों के बराबर देता है। रहमतों का महीना है रमजान। रमजान को तीन अशरे में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत का है। इस अशरे में अल्लाह तआला अपने रहमत से अपने बंदों को नवाजता है। दूसरा अशरा मगफिरत का है यानी रब्बुल आलमीन से अपने गुनाहों की माफी मांगने का। इस अशरे में अल्लाह का कोई भी बंदा अगर दिल से अपने गुनाहों की माफी मांगता है, तो रब्बुल आलमीन उसे माफ कर देता है।

तीसरा अशरा निजात का है। इस अशरे में खुदा की इबादत करने वालों को जहन्नुम की आग से मुक्ति मिलती है। वैसे तो रमजान का पूरा महीना ही रहमतों का महीना है, लेकिन सबसे अहम है तीसरा अशरा। क्योंकि इसी अशरे की ताक रातों में यानी 21, 23, 25, 27, 29 रमजान की रात पाक कुरआन शरीफ नाजिल हुई थी। इन रातों में से जिस रात को कुरआन शरीफ नाजिल हुई, उसे शबे कद्र की रात कहते हैं। इसलिए इन रातों की अहमियत काफी बढ़ जाती है। शबे कद्र की रात को हजार महीने की रातों के बराबर बताया गया है।

लेकिन वह कौन सी रात है, किस रात को कुरआन शरीफ नाजिल हुई, यह ठीक-ठीक मालूम नहीं है। इसलिए रोजेदार इन पांचों रात को जागकर खुदावंद करीम की इबादत करते हैं। इसके बारे में एक रवायत है कि एक बार मोहम्मद साहब मदीना स्थित मस्जिदे नबवी में पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि दो लोग किसी बात पर तकरार कर रहे हैं। हमारे नबी उन्हें लड़ते देखकर बोले, मालूम है, आज मैं आप लोगों को यह बताने आया था कि पाक कुरआन शरीफ किस रात नाजिल हुई, लेकिन आप लोगों की लड़ाई की वजह से वह बात मेरे जेहन से उठा ली गई। अब बस मैं इतना बता सकता हूं कि रमजान के तीसरे अशरे की किसी ताक रात को नाजिल हुआ था।

रमजान के तीसरे अशरे में ही फितरा और जकात भी निकालते हैं, जिससे ईद की नमाज गरीब लोग भी खुशी से पढ़ सकें। वैसे ईद के बाद भी फितरा और जकात निकाला जा सकता है, लेकिन रमजान में ही यह निकालना बेहतर होता है। रमजान हमें बताता है कि हर किसी के साथ मिलकर रहें, बुराइयों से बचें। सिर्फ भूखे न रहें, हर नफ्स का रोजा रखें। मतलब एक इंसान को इंसानियत के राह पर ले जाने वाला होता है रमजान। आरवरी जुम्मा 15 जून को होगा।
साभार : मास्टर अख्तयार अली

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