यह चूक है या फिर…

यदि दो दर्जन से अधिक नाम और संस्थाओं के आगे बने विभिन्न कॉलम में चार-पांच में ‘रिक्त स्थान’ छूट गया होता तो ठीकरा ‘भूल-चूक’ पर फोड़ा जा सकता था, लेकिन सिर्फ एक नाम के आगे ‘रिक्त स्थान’ छूट जाना कई तरह के संदेह पैदा करता है।
बिजयनगर। बिजयनगर नगर पालिका की हर कारगुजारी पहले से ‘उम्दा’ होती जा रही है। प्रस्तावों पर माथापच्ची करने के बजाय बैठक रद्द करने में ही ‘भला’ समझने वाली इस नगर पालिका में कब किस बात पर ‘डंडी’ मार दे, कहा नहीं जा सकता। कहां किस बात को याद रखा जाए और कहां पर ‘भूल-चूक’ के मत्थे ठीकरा फोड़ दिया जाए, इस ‘कला’ में भी नगर पालिका सिद्धहस्त होते जा रही है। आलम यह है कि नगर पालिका अब अपनी सहूलियत के लिए ‘भूल-चूक, लेनी-देनी’ पर दांव लगाने से भी परहेज नहीं कर रही।

यदि दो दर्जन से अधिक नाम और संस्थाओं के आगे बने विभिन्न कॉलम में चार-पांच में ‘रिक्त स्थान’ छूट गया होता तो ठीकरा ‘भूल-चूक’ पर फोड़ा जा सकता था, लेकिन सिर्फ एक नाम के आगे ‘रिक्त स्थान’ छूट जाना कई तरह के संदेह पैदा करता है। … और यदि वही ‘एक’ कोई खास हो तो संदेह को और बल मिलता है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता। सवाल यह उठता है कि यदि यह महज एक भूल-चूक है तो उस रिक्त स्थान पर क्या है, इसका सार्वजनिक रूप से खुलासा किया जाना चाहिए। इस पर ‘चुप्पी अथवा खामोशी’ इस संदेह को कई गुना बल देगा। दरअसल, बिजयनगर नगर पालिका की ओर से एक समाचार पत्र में प्रकाशित लम्बे-चौड़े ‘आम सूचना’ पर इन दिनों इसी चूक पर खूब कानाफूसी हो रही है। लोगों को इस चूक में ‘खेल’ नजर आने लगा है।

किसी को भी यह बात हजम नहीं हो रही कि यह महज एक ‘भूल’ है। शहर में यह कानाफूसी अब कोलाहल में तब्दील होती जा रही है लेकिन जिम्मेदारों की ‘खामोशी’ संदेह के बादल को और घना कर दिया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि नगर पालिका के जिम्मेदार इस संदेह की स्थिति को स्पष्ट करेंगे। बहुत संभव है कि यह वास्तविक चूक हुई है। ऐसे में इस चूक में सुधार की गुंजाइश तो शेष है। सार्वजनिक रूप से इस सुधार की जानकारी आम-सूचना के माध्यम से आम लोगों को दी जानी चाहिए।
जय एस. चौहान

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