योग करें, स्वस्थ रहें…

ऐसे में सीधा, सरल व सुलभ मार्ग योग ही है, जिससे मोबाइल के दुष्परिणाम को रोका जा सकता है। योग जरूरी है, सबके लिए है। नए भारत के निर्माण में योग अपनी महती भूमिका निभा सकता है। आइए, योग करें, स्वस्थ रहें…।
भारतीय ऋषि आर्यभट्ट ने शून्य की खोज की। यही ‘शून्य’ बाद में विज्ञान, गणित, रसायनशास्त्र सहित कई विषयों को नई उचाईयां दी। योग भी भारतीय ऋषि-मुनियों की इस जगत को अनुपम भेंट है। स्वास्थ्य है तो सब कुछ है। इसी धारणा के दृष्टिगत योग और आसन का तारतम्य बना। कालांतर में योग सिर्फ ऋषि-मुनियों के तपस्थली तक ही सिमटा रहा। योग की अवधारणा को संन्यास से जुड़ गया। इस मिथक को तोडऩे में सदियों लग गए। समय के साथ-साथ यह भारतीय जनमानस तक पहुंचा। टेलीविजन युग के पदार्पण के बाद यह भारत के आम-ओ-खास तक पहुंचा। अब भारतीय योग की धमक पूरे विश्व में है। हर भारतीय को इस पर गर्व करना चाहिए।

अब जरूरत इस बात की है कि योग को पाठ्यक्रम से कैसे जोड़ा जाए? हालांकि कई स्कूलों में योग सिखाए जाते हैं, लेकिन ऐसे स्कूलों की संख्या बेहद कम है। इसे हर हाल में बढ़ाने की जरूरत है। नई पीढ़ी को खासकर नौनिहालों को योग और आसन के प्रति लगाव पैदा करना ही होगा। टीवी की धमक युवाओं और बच्चों को खेल मैदान तक लेकिन मोबाइल क्रांति ने खेलकूद में पसीने बहाने वालों युवाओं और खासकर बच्चों पर एक तरह से बंदिश लगा दी है। इस अवधारणा को योग और आसन ही तोड़ सकता है। मोबाइल पर गेम खेलने वाले बच्चों के अभिभावकों को चिंतित होना लाजिमी है।

मोबाइल पर अधिक समय बीताने वाले युवाओं और बच्चों के दिनचर्या पर असर पडऩा शुरू हो गया है। कई बुद्धिजीवी इसको लेकर आए दिन चिंता जताते रहे हैं। लेकिन इसका तोड़ क्या है, यह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सीधा, सरल व सुलभ मार्ग योग ही है, जिससे मोबाइल के दुष्परिणाम को रोका जा सकता है। योग जरूरी है, सबके लिए है। नए भारत के निर्माण में योग अपनी महती भूमिका निभा सकता है। आइए, योग करें, स्वस्थ रहें…। सिर्फ योग दिवस पर ही नहीं, दिनचर्या में अपनाएं योग।

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