वन विभाग की अनदेखी, पौधशाला बहा रही अपनी दुर्दशा पर आंसू

बांदनवाड़ा। (राजेश मेहरा) एक ओर सरकार व विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं पौधारोपण व हरित भारत को लेकर संवेदनशील है, वहीं वन विभाग की अनदेखी के कारण यहां के अमरगढ़ रोड स्थित पौधशाला अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। नर्सरी में बने सरकारी कार्यालय व भवन खण्डहर में तब्दील होते जा रहे हैं। पूरी नर्सरी में कंटीली झाडिय़ों व बिलायती बबूलों ने घर कर रखा है। कभी हरे-भरे पेड़-पौधों से आबाद रहने वाली पौधशाला में अब कंटीली झाडिय़ों का कब्जा है।

करीब 35 वर्ष पूर्व इस नर्सरी की स्थापना की गई थी। उस वक्त यहां विभिन्न किस्म के नए पौधे तैयार किए जाते थे और विभिन्न संस्थाओं व सरकारी संस्थानों में वितरित किए जाते थे। वर्ष 1984 में इस नर्सरी में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी व सोनिया गांधी ने अपनी यात्रा के दौरान कल्पवृक्ष का जोड़ा भी रोपा था, जो अब एक विशाल कल्पवृक्ष बन चुका है। लेकिन विभाग की अनदेखी के चलते धीरे-धीरे ठूंठ होते जा रहा है। यहां चारों ओर अशोक सहित अन्य वृक्ष लगे हुए हैं, परन्तु इनकी सार-संभाल करने वाला कोई नहीं है।

वन विभाग के कर्मचारी कभी-कभार यहां आकर सिर्फ खानापूति कर जाते हैं। यहां पौधशाला में बने सरकारी आवास, पानी का हौद, नर्सरी की क्यारियां लगभग खंडहर चुकी है। वहीं समाजकंटक सरकारी आवास के खिड़की, दरवाजे आदि उखाड़कर ले गए हैं। अब ये नर्सरी असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुकी है। इस नर्सरी उद्यान का कोई धणी-धोरी नहीं है। कई वर्षों से जीर्र्णोद्धार की बाट जोह रही यह पौधशाला सिसक रही है। नर्सरी में पशुपालक अपने मवेशियों को विचरण करा रहे हैं।

इस मार्ग से कई आलाधिकारियों व मंत्रीगणों का आना-जाना रहता है, परंतु इस नर्सरी को आबाद करने का मानस किसी ने नहीं बनाया। जब इस पौधशाला में हरियाली रहा करती थी तब यहां स्थानीय लोगों व विशेषकर महिलाओं का आना-जाना लगा रहता था। नर्सरी परिसर में बने शिव मंदिर व कल्पवृक्ष की पूजा के लिए महिलाएं यहां जाती थी, अब इस पौधशाला में चारों तरफ कंटीली झाडिय़ों व गंदगी के कारण जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है, जिस कारण महिलाएं यहां आने से परहेज करती हैं।

पौधशाला बन रही शौचालय
वन विभाग की उदासीनता के कारण यहाँ आसपास रहने वाले घुमंतु जाति के लोगों व आसपास रहने वाले लोगों ने इस पौधशाला का उपयोग शौचालय के रुप में करना शुरु कर दिया है। जिससे किसी जमाने में पौधों व हरियाली से आबाद रहने वाली वाली पौधशाला गंदगी का ढेर बनती जा रही है।

खारीतट संदेश व्यू
जिस नर्सरी में पूर्व प्रधानमंत्री ने कल्पवृक्ष के पौधे लगाए हों, वहां अब कंटीली झाडिय़ों ने कब्जा कर लिया है तो जाहिर है कि खामी नर्सरी में नहीं व्यवस्था में है। नर्सरी के हालात कई सवाल पैदा कर रहे हैं। क्या इस नर्सरी की शुरुआत कंटीली झाडिय़ों और विलायती बबूल को संरक्षित करने के लिए किया गया था? यदि नहीं तो फिर इस नर्सरी का हश्र ऐसा क्यों है? इसका जवाब न केवल जिम्मेदार अधिकारियों को बल्कि जनप्रतिनिधियों को भी देना चाहिए। साथ ही सामाजिक व धार्मिक संगठनों को भी इस नर्सरी की सुध लेकर इसका कायाकल्प करना चाहिए। नर्सरी में फूल व लताएं ही अच्छी लगती हैं, कंटी झाडिय़ां नहीं। आइए, इस नर्सरी के उत्थान और खूबसूरत बनाने के लिए मिलकर एक भगीरथ प्रयास करें।

बोले क्षेत्रवासी…
यहां के लोगों के लिए घूमने-फिरने के लिए यह अच्छी जगह हुआ करती थी। परंतु वन विभाग की अनदेखी के चलते अब नर्सरी लगभग उजड़ चुकी है। चारों ओर कंटीली झाडिय़ां व जानवरों ने घर कर रखा है। इसे सही करवाकर यहाँ पुन: पौधों को उत्सर्जन करना चाहिए।
सुनीता, गृहिणी

महिलाओं व बुर्जुगों तथा बच्चों के लिए यह जगह काफी उपयुक्त है। चारों ओर हरे-भरे वृक्ष इसकी सुंदरता बढ़ाते थे। पौधों की विभिन्न किस्म यहां तैयार की जाती थी। परंतु धीरे-धीरे यहां पर विभाग ने भी ध्यान देना बंद कर दिया और जनप्रतिनिधियों ने तो इसकी ओर नजर तक नहीं की। पूरे गांव में इससे सुंदर जगह नहीं है। इसे पुन: मूलधारा में लाने के भामाशाहों व जनप्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए।
चैना लोढ़ा, गृहिणी

यहां के अमरगढ़ रोड पर स्थित नर्सरी उजाड़ हो चुकी है। जहरीले जीव-जंतु होने के कारण वहां महिलाएं कल्पवृक्ष व शिव मंदिर की पूजा-अर्चना नहीं कर पाती हैं। इस नर्सरी को वन विभाग व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को मिलकर इसे पुन: जीवंत रूप में लाने के प्रयास करने चाहिए।
रंजना, गृहिणी

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