सूरतगढ़ तापीय संयंत्र पर संकट के बादल

बीकानेर। (वार्ता) राजस्थान में गंगानगर जिले के सूरतगढ़ तापीय विद्युत संयंत्र में कोयले की कमी से संकट के बादल मडरा सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि सूरतगढ़ के तापीय विद्युत संयंत्र में 250-250 मेगावाट के छह संयंत्र हैं जिनमें 1500 मेगावाट विुद्युत का उत्पादन होता है। इसके अलावा यहां 650 -650 मेगावाट की सातवीं और आठवीं सुपर क्रिटिकल इकाईयां भी लगाई जा रही हैं, इनमें एक इकाई तैयार हो चुकी है जबकि दूसरी पूर्ण होने को है। इनके शुरू होने के बाद यह संयंत्र एशिया का सबसे बड़ा संयंत्र हो जायेगा।

केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से राजस्थान ऊर्जा विकास निगम को पत्र भेजा गया है जिसके अनुसार कोयला खदान से संयंत्र की दूरी एक हजार किलोमीटर से अधिक होने से कोयला काफी महंगा पड़ रहा है, लिहाजा एक नवम्बर ,2018 से 31 अक्टूबर 2019 तक कोयला खुली नीलामी के जरिए नजदीकी संयंत्र को बेचा जा सकता है।

सूरतगढ़ तापीय संयंत्र में कोयला उड़ीसा और झारखंड की खदानों से आता है, यह कोयला अम्बिकापुर के जरिए सूरतगढ़ भेजा जाता है। करीब 20 सालों से कोयला इसी तरह से आ रहा है। यहां रोजाना करीब 16 हजार टन कोयले की खपत होती है। अचानक ऊर्जा मंत्रालय के इस फैसले से सूरतगढ़ संयंत्र को कोयले की आपूर्ति नहीं हो पायेगी, लिहाजा यहां विद्युत उत्पादन ठप होना तय है। हालांकि राजस्थान ऊर्जा विकास निगम स्पष्ट रूप से कुछ भी कहने से कतरा रहा है, लेकिन संयंत्र को कोयला ही नहीं मिलेगा तो संयंत्र में विद्युत उत्पादन कैसे होगा, इसे मुद्दे पर निगम का कहना है कि संयंत्र में मांग के अनुसार विद्युत का उत्पादन किया जायेगा।

सूत्रों ने बताया कि पिछले दो वर्ष से संयंत्र मुनाफे में चल रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में संयंत्र ने करीब 166 करोड़ रुपये और चालू वित्त वर्ष में अब तक 172 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। इसके अलावा संयंत्र को विद्युत उत्पादन के लिये कई बार पुरस्कार भी मिल चुके हैं। फिर इस संयंत्र को अचानक कोयले की आपूर्ति रोकना समझ से बाहर है। उधर सूत्रों ने बताया कि संयंत्र के निजीकरण की कोशिशें की जा रही हैं।

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