बेहतर उत्पादन के लिए उपचारित बीज ही खेत में डालें

खेती-बाड़ी: कृषि अधिकारी घनश्याम जोशी से बातचीत
प्रश्न: मानसून ने दस्तक दे दिया है। ऐसे में खेतीबाड़ी के लिए किसानों को क्या करना चाहिए?
उत्तर: हल्की बारिश होने पर खेतों की जुताई करनी चाहिए, जिससे खेतों में जो कचरा होता है वह जमींदोज हो जाए। साथ ही जिन किसान भाईयों ने अपने खेतों में देशी खाद नहीं डाली है उनकों देसी खाद डाल लेनी चाहिए। अभी किसान भाईयों को लम्बे समय में पकने वाली फसल को बोना चाहिए। फसल की बुवाई से पहले प्रारम्भिक उर्वरक संतुलित मात्रा यानि न कम न ज्यादा देना चाहिए। यदि काश्तकार भाई घर का ही बीज काम में ले रहे हैं तो बीज उपचारित कर लेना चाहिए जिसमें थायरम 3 ग्राम प्रति किलो, टाइक्रोग्रमा 8 ग्राम प्रति किलो, जीवाणु कल्चर 200 ग्राम प्रति ढाई बीघा जमीन के लिए पर्याप्त है। खेत के हिसाब से बीज की उचित मात्रा का ध्यान रखें। खेत में फसल की बुवाई (उमरा निकालना) करते समय बुवाई उत्तर से दक्षिण की ओर करें। इससे अच्छी फसल का लाभ होगा और यदि बारिश में देरी होती है तो कम समय में पकने वाली फसलों का चयन करना चाहिए।

प्रश्न: क्षेत्र में बारिश कम होती है तो किसानों को कम पानी वाली किस फसल पर ध्यान देना चाहिए?
उत्तर: कम पानी की फसलों में मूंग (आईपीएम 02-03, एसएमएल-668) किस्म का प्रयोग करना चाहिए। इस किस्म में यदि देरी से भी बुवाई की जाती है तो अच्छी पैदावार होती है। तिल (टी-1, प्रताप तिल) इस किस्म में कम पानी में पौधों की संख्या पर्याप्त होनी चाहिए न कम और न ही ज्यादा। साथ ही कम पानी की स्थिति में यदि खेतों की निणाई यदि समय-समय पर की जाए तो अधिक पैदावार हासिल की जा सकती है।

प्रश्न: सरकार किसानों की आय दोगुनी करने पर जोर दे रही है। आस-पास के किसानों को आप क्या सलाह देना चाहेंगे?
उत्तर: किसानों को मिट्टी की जांच अनुरूप ही उर्वरक डालनी चाहिए। इसके अलावा उचित बीज दर, समय पर बुवाई तथा बीज उपचारित कर ही खेत में डालनी चाहिए। फसल बदल-बदल कर खेती करनी चाहिए। दलहन व तिलहन फसलों में जिप्सम का इस्तेमाल करना चाहिए। आईपीएम पद्धति से फसल को कीड़ों व बीमारियों से बचाया जा सकता है। वर्तमान में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा परम्परागत कृषि विकास योजना पर अधिक जोर दिया जा रहा है।

प्रश्न: यहां की मिट्टी, बाजार और संसाधन के मद्देनजर किसानों को किस पर अधिक फोकस करना चाहिए?
उत्तर: सरकार का उद्देश्य दलहन दोगुनी और तिलहन तीगुनी करने का उद्देश्य है।

प्रश्न: उद्यानिकी, पशुपालन में यहां के किसानों के लिए क्या सम्भावनाएं हैं?
उत्तर: ये दोनों व्यवसाय एक-दूसरे के पूरक हैं। इन दोनों में बेहतर संभावनाएं हैं।

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