प्रस्ताव पर हो अमल

स्मृतिलोप से जूझ रही नगर पालिका को राव बिजयसिंहजी की प्रतिमा लगाने को लेकर लिए गए प्रस्ताव पर अब पहल करनी चाहिए। ताकि प्रस्ताव पर थोथा होने का कलंक न लगे।
समय की कसौटी पर एक साल कम नहीं होता। खासकर, तब जब उसकी तय उम्र पांच वर्ष में से शेष तीन वर्ष बचे हों। जनता से किया गया वादा यदि प्रस्ताव लेकर भी पूरा नहीं किया जाए तो इस वादाखिलाफी पर जश्न तो कतई नहीं मनाया जा सकता। खारीतट संदेश ने शहर के संस्थापक राव बिजयसिंहजी की जीवन-परिचय से पाठकों को रूबरू कराते हुए शहर में उनकी प्रतिमा लगाने की मांग पुरजोर तरीके से रखी थी। शहर के गणमान्य नागरिकों सहित कई संस्थाओं ने अपना समर्थन दिया था। उस मुद्दे को उठाए एक वर्ष से अधिक हो गए।

नगर पालिका प्रशासन ने 27 मील चौराहे पर शहर के संस्थापक राव बिजयसिंहजी की प्रतिमा लगाने के लिए जगह चिह्नित भी कर दी थी। इस एक वर्ष में प्रतिमा लगाने को लेकर नगर पालिका प्रशासन में कोई हलचल नहीं है। हालांकि इस एक वर्ष में शहर में बहुत कुछ हुआ लेकिन राव बिजयसिंहजी की प्रतिमा लगाने पर नगर पालिका प्रशासन में चर्चा तक नहीं हुई। नगर पालिका को स्मृतिलोप हो सकता है, सुधि पाठकों और गणमान्य नागरिकों को नहीं।

खारीतट संदेश के सुधि पाठकों को एक वर्ष पूर्व लिए गए प्रस्ताव के एक-एक बिंदु स्मरण है। यूं तो जनप्रतिनिधियों के अधिकतर वादे थोथे ही साबित होते हैं, लेकिन प्रस्ताव पर नाउम्मीद कैसे किया जा सकता है। शांतिदेवी का घर नालियों के पानी से घिर कर टापू बन जाता है। हुक्मरानों के आश्वासन यहां भी थोथे ही साबित हुए। आश्वासन के सिर-पैर नहीं होते लेकिन नगर पालिका के प्रस्तावों को जुमला समझकर कतई खारिज नहीं किया जा सकता है। दरअसल, लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई शहर की सरकार प्रस्तावों के पतवार से ही अपना कार्यकाल पूरा करती है। पुन:श्च स्मृतिलोप से जूझ रही नगर पालिका को राव बिजयसिंहजी की प्रतिमा लगाने को लेकर लिए गए प्रस्ताव पर अब पहल करनी चाहिए। ताकि प्रस्ताव पर थोथा होने का कलंक न लगे।

– जय एस. चौहान –

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