भगवान भरोसे हो जाएगा आउटडोर!

बिजयनगर शहर व आसपास के लाखों लोगों की सेहत भगवान भरोसे है। राजकीय चिकित्सालय और आयुर्वेद औषधालय की स्थिति दयनीय है। सिर्फ एक वैद्यजी के भरोसे औषधालय चल रहा है। राजकीय चिकित्सालय में 10 में से चार चिकित्सकों के पद खाली हैं, पांंचवें की तैयारी है। डॉक्टर हर्षवर्द्धन यादव के तबादले की चर्चा है। ऐसे में आउटडोर भी भगवान भरोसे हो जाएगा। हालांकि पेंशनर समाज ने चिकित्सा मंत्री से उनका तबादला निरस्त करने की मांग की है…। बिजयनगर की चिकित्सा सेवा पर खारीतट संदेश की यह विशेष रिपोर्ट…

बिजयनगर। करीब 60 हजार की आबादी वाले बिजयनगर कस्बे सहित आस-पास के लगभग 80 गांवों का प्रमुख चिकित्सा केन्द्र राजकीय चिकित्सालय बिजयनगर अव्यवस्था का शिकार है। अस्पताल में चिकित्सकों के कुल स्वीकृत 10 पदों में से 4 पद खाली हैं। कोढ़ में खाज यह है कि अस्पताल के आउटडोर में सर्वाधिक मरीजों को देखने वाले डॉ. हर्षवर्द्धन यादव का तबादला हो जाने के कारण आने वाले दिनों में अस्पताल में अव्यवस्थाए और बढ़ेगी। हालांकि स्थानीय पेंशनर समाज ने मुख्यमंत्री और चिकित्सामंत्री को पत्र लिखकर डॉ. यादव का तबादला आदेश निरस्त करने की मांग की है।

स्थानीय राजकीय चिकित्सालय में अस्पताल प्रभारी एवं फिजिशियन डॉ. गोपाल जोशी, स्त्रीरोग विशेषिज्ञ डॉ. मधु जोशी, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप गर्ग, दंत रोग चिकित्सक डॉ. धनभाग भाटी व डॉ. ममता चौधरी सहित कुल 6 चिकित्सक वर्तमान में अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं डॉ. विनिता, डॉ. राजकुमार, डॉ. मेघा अरोड़ा प्रतिनियुक्ति पर राजकीय आदेश के कारण अन्यत्र सेवाएं दे रहे हैं जबकि उक्त तीनों चिकित्सकों का वेतन बिजयनगर चिकित्सालय के मद से हो रहा है। इसके बावजूद न तो चिकित्सा महकमे के अधिकारी और न ही जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान दे रहे हैं। इसके चलते अस्पताल में आने वाले मरीजों को संतोषप्रद उपचार में परेशानी का सामना करने से इनकार नहीं किया जा सकता।

आउटडोर में रोजाना 400 मरीज
अस्पताल के आउटडोर में रोजाना औसतन 400 मरीजों की आवक रहती है। इसके चलते आउटडोर समय में अस्पताल में मरीजों व उनके परिजनों की भीड़ लगी रहती है। लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण यहां आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।

दो-दो चिकित्सक का क्या औचित्य?
स्थानीय चिकित्सालय के दन्त रोग विभाग में दन्त रोग की दो महिला चिकित्सकों की नियुक्ति का औचित्य समझ से परे है। इसके बावजूद चिकित्सा महकमे ने आँखे मूंद कर जरूरत नही होने के बावजूद दन्त रोग के दो चिकित्सकों की यहां नियुक्ति कर रखी है। जबकि लम्बे समय से अस्पताल में सर्जन का पद रिक्त चल रहा है तथा कस्बे के निकट हाईवे पर आये दिन दुर्घटनाओं के बावजूद यहां पर सर्जन का पद डॉ. ए.पी.माथुर के सेवानिवृत्ति के बाद से भरा ही नहीं गया। गौरतलब है कि दन्त रोग विभाग में दो चिकित्सकों की नियुक्ति के बावजूद आउटडोर समय में इस रोग के औसतन रोजाना करीब 6 से 8 मरीज ही उपचार के लिए आते हैं।

निरस्त हो तबादला
राजकीय चिकित्सालय में नियुक्त डॉ. हर्षवर्द्धन यादव के तबादले की जानकारी मिलने पर पेंशनर समाज की ओर से विभाग के अधिकारियों व मंत्री को पत्र प्रेषित कर तबादला आदेश निरस्त करने की मांग की गई है। डॉ. यादव के उपचार और उनके व्यवहार से सिर्फ पेंशनर समाज के वृद्धजन ही नहीं आमजन भी संतुष्ट हैं। इसलिए विभाग को चाहिए कि डॉ. यादव का तबादला आदेश तुरंत निरस्त कर बिजयनगर की जनता को राहत प्रदान करें।

देवकीनन्दन शर्मा, पेंशनर समाज, बिजयनगर

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