निर्भया कांड के दोषियों की फांसी बरकरार, सजा में लग सकता है समय

नई दिल्ली। वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद माना जा रहा था कि सभी दरिंदों को पांच-छह महीने के भीतर अदालती व अन्य प्रक्रिया पूरी कर फांसी पर लटका दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। घटना के साढ़े पांच साल बाद भी दरिंदे फांसी पर नहीं लटक पाए हैं। इस केस की जांच से जुड़े वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की माने तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा चारों दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज करने के बाद अब उनके सामने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने का एक मात्र विकल्प बचा है। अगर, राष्ट्रपति दया याचिका ठुकरा देते हैं तो चार से पांच महीने के भीतर चारों दोषियों को फांसी हो जाएगी।

दया याचिका दायर करने के लिए अधिकतम 90 दिन का वक्त मिलता है। कई बार अदालत दया याचिका दायर करने के लिए 90 दिन से भी कम समय देती है। चारों को दया याचिका दायर करने से पहले दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव के पास अपील करनी होगी। वहां से सरकार इनकी याचिका के साथ अपनी टिप्पणी लिखकर उपराज्यपाल के पास भेज देगी। सरकार सजा को लेकर क्या सोचती है, सजा कम की जानी चाहिए अथवा बरकरार रखी जानी चाहिए, टिपप्णी में इसका जिक्र होता है। इसके बाद उपराज्यपाल इस याचिका को राष्ट्रपति के पास भेज देते हैं। राष्ट्रपति चाहें तो दिल्ली सरकार से दोबारा राय मांग सकते हैं। इसके बाद अपना अंतिम फैसला देते हैं।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी जिसके बाद इन दोषियों ने एक-एक कर रिव्यू पिटिशन दाखिल की। नियम के तहत रिव्यू पिटिशन की ओपन कोर्ट में सुनवाई हुई और बाद में 4 मई 2018 को अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट में फैसले के बाद निर्भया के माता-पिता ने कहा कि उन्हें इंसाफ की पूरी उम्मीद थी और वे चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी इन्हें फांसी पर लटकाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले निर्भया के माता-पिता ने कहा कि निर्भया देश की बेटी थी। हम चाहते हैं कि मेरी बेटी के साथ जघन्य हरकत करनेवालों को ऐसी सजा मिले जो सबके लिए मिसाल बने। हमें फांसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। चारों दोषियों को जब फांसी की सजा मिलेगी तभी हमारी बेटी को न्याय मिल सकेगा। सोमवार को फैसला आने के बाद निर्भया के पिता ने कहा कि आज भी बेटियों के साथ अपराध हो रहे हैं, ऐसे में जल्द से जल्द इन दोषियों को फांसी दी जाए जिससे समाज में संदेश जाए और ऐसी हरकत करनेवाले डरें।

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