हजारों श्रावकों की मौजूदगी में छोड़ा सांसारिक जीवन, संयम पथ पर बढ़ी आगे

बिजयनगर। (खारीतट सन्देश) मुमुक्षु भंवरीबाई चौधरी ने बुधवार सुबह हजारों श्रावक-श्राविकाओं की मौजूदगी में सांसारिक जीवन त्यागकर संयम पथ अंगीकार किया। मुनि प्रियदर्शन ने जैसे ही मुमुक्षु भंवरी को जैन दीक्षा मंत्र के साथ चरवला प्रदान किया, वह अंतरमन से दीक्षा महोत्सव में झूम उठी। सांसारिक चोला छोडने के पहले मुमुक्षु ने अपने परिजनों से मिच्छामि दुक्कड़म किया तो परिजनों सहित श्रावक-श्राविकाओं की आंखें भर आई। केश लोचन के बाद मुमुक्ष भंवरी ने साध्वी वेश धारण किया।

विजय मुहूर्त में मुनि प्रियदर्शन ने मुमुक्षु को साध्वी रूप में विदेहप्रज्ञा नाम दिया। दीक्षा महोत्सव से पूर्व अस्थाई निवास वकील कॉलोनी में वीरथाल की रस्म पूरी की। वहां से शोभायात्रा के साथ शांति भवन पहुंची, जहां बड़ी संख्या में जैन समाज के लोगों ने अगवानी की व जयकारों के साथ दीक्षा स्थल ले गए। मुनि प्रियदर्शन साध्वी कमलप्रभा आदि ठाणा ने मुमुक्षु बहन को संयम पथ की दीक्षा दिलाई। साध्वी कमलप्रभा जी म.सा. ने कहा कि संयम पथ कठिन है लेकिन यदि मन उसको अपना ले तो वह सरल बन जाता है। प्राज्ञ मित्र मण्डल सेवा संस्थान के मंत्री अभय चपलोत ने बताया कि साध्वी विदेह प्रज्ञा में दस माह से वैराग्य उत्पन्न हुआ था।

उन्होंने जैन शिक्षा के रूप में नन्दी सूत्र, दशवैकालिक सूत्र, उत्तराध्ययन, सुखरियाक, अन्तगढ़ सूत्र, अर्थमोहित का अध्ययन किया। दीक्षा महोत्सव में भीलवाड़ा जिले के अलावा अजमेर, ब्यावर, बिजयनगर, केकड़ी, सरवाड़, किशनगढ़, पीसांगन, भिनाय, नसीराबाद आदि स्थानों से सैकड़ों श्रावक शामिल हुए।

बिजयनगर गुलाबपुरा से यह हुए शामिल 
विजयनगर संघ के मंत्री ज्ञान सिंह सांखला, ज्ञानचन्द सिंघवी, गुमान सिंह करनावट, सम्पतराज लुणावत, तेजमल बुरड़, महेंद्र बाबेल, संदीप सांखला ,दिलीप मेहता, सुरेंद्र सिंघवी, ज्ञान चंद कोठारी , संजीव कोठारी, पदम् चौधरी, सुरेश चंद्र लुणावत तिलोरा , सुरेंद्र पिपाडा, गुलाबपुरा से संघ अध्यक्ष भीम सिंह संचेती, मंत्री हनुमान सिंह बरड़िया, लक्ष्मी लाल दमानी, राजेन्द्र संचेती, शांति लाल डांगी, सरदार सिंह बम्ब, गौतम आंचलिया, महावीर चोरडिया, इत्यादि श्रावक,श्राविकाओं ने शामिल होकर दीक्षार्थी की अनुमोदना की।

खुद को निकाला भंवरजाल से-मुनि प्रियदर्शन
मनुष्य जीवन पद बदलने वाले होते हैं, फिर भी उसके पीछे दौड़ता रहता है। सांसारिक जीवन में व्यक्ति शाम, दाम, दण्ड, भेद, अपनाकर पद पाने का पुरुषार्थ करता है किन्तु संसार में पद अस्थायी होने से उनके आगे भूतपूर्व लग जाता है। मुमुक्षु भंवरी बाई चौधरी ने खुद को संसार के भंवरजाल से निकाल कर संयम पथ अंगीकार किया। अब से वह इस पथ पर साध्वी विदेहप्रज्ञा नाम से जानी जाएगी।

जीवन परिचय
नाम – भंवरी बाई चौधरी
जन्म तिथी – 1 जनवरी 1953
जन्म स्थान – जामोला (ननिहाल)
माता – कंचन बाई सोनी
पिता –  मांगी लाल सोनी
भाई – रिखबचंद सोनी
ननिहाल पक्ष –  हगामीलाल, पुखराज मेहता जामोला
पुत्र –  संजय, अरविन्द चौधरी
पोत्र –  पोत्री अमन, अक्षिता, रावी
शिक्षा –  टांटोटी (केकड़ी)

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