स्कूलों में अब दूध भी पी रहे नौनिहाल

अन्नपूर्णा दूध योजना: पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों को दूध पिला रही है सरकार
बिजयनगर. राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों की सेहत सुधारने के लिए एक अभिनव पहल अन्नपूर्णा दूध योजना शुरू की है। हालांकि सरकार की इस कार्ययोजना से विभागों की मशक्कत तो बढ़ी है पर बच्चे खुश हैं। घरों में दादी-नानी के हाथों दूध पीने में ना-नुकुर करने वाले बच्चे भी देखा-देखी खुशी-खुशी दूध पी रहे हैं।
बिजयनगर। राजस्थान सरकार ने एक अभिनव पहल करते हुए कक्षा एक से कक्षा आठवीं तक के बच्चों को स्कूल में दूध पिलाएगी। नौनिहालों की सेहत को लेकर 2 जुलाई से शुरू की गई अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत अब सरकारी स्कूलों में सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को प्रार्थना सभा के बाद बच्चों को दूध पिलाया जा रहा है। योजना के अनुसार कक्षा 1-5 तक के बच्चों को 150 ग्राम एवं कक्षा 6-8 तक के बच्चों को 200 ग्राम सरस डेयरी का दूध पिलाया जा रहा है।

यह है योजना का उद्देश्य
इस योजना के संचालन का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक आहार देना है। क्योंकि दूध सम्पूर्ण आहार है। शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी न रहे इसलिए सरकार ने पूरे राज्य में सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 के अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों के लिए अन्नपूर्णा दूध योजना संचालित की है। इसके साथ ही सरकारी विद्यालयों में नामांकन वृद्धि भी होगी।

ये हैं फायदे
दूध के अन्दर सभी आवश्यक पौष्टिक तत्व होते हैं। दूध पीने से हमें शारीरिक व मानसिक बल मिलता हैं। दूध एक सम्पूर्ण पौष्टिक आहार होता है।

सतर्कता है जरूरी
दूध वितरण के समय और दूध तैयार करते समय हमें महत्वपूर्ण सावधानियों बरतने की जरूरत है।
1. बच्चों को ज्यादा गर्म दूध नही पिलाना चाहिए।
2. दूध उबालने के बर्तन में दूध जल न जाये इसके लिए दूध को चम्मच और पलटे से लगातार हिलाते रहना चाहिए।
3. दूध को पूरा उबालकर ठण्डा करके बच्चों को पिलाना चाहिए।
4. दूध को जिस बर्तन में उबाला जा रहा है उसे भली प्रकार से साफ करना चाहिए।
5. बच्चों को दूध वितरण करने से पूर्व दूध को चखना अवश्य चाहिए।
6. विद्यालय में फस्र्टऐड बॉक्स रखें। ताकि यदि किसी भी समय गर्म दूध किसी पर गिर भी जाए तो तत्काल प्राथमिक उपचार हो सके।

क्या कहते हैं नौनिहाल
दूध पीने के बाद शरीर को ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे दिनभर पढ़ाई में मन लगा रहता है। अभी मीठा दूध पी रही हूं, लेकिन धीरे-धीरे फीका दूध पीने की आदत डालूंगी। दूध में सभी आवश्यक तत्व मौजूद होते हैं।

रानू टेलर, कक्षा 8
दूध पीने से हमें शारीरिक व मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। दूध पीने से एकाग्रता की शक्ति में विकास होता है। दूध पीने से यादादाश्त तेज होती है। दूध पीने से दिनभर शरीर चुस्त रहता है। मैं वैसे रोजाना दूध पीती हूूं, जिस दिन स्कूल में दूध पिलाया जाना होता है उस दिन घर से दूध पीकर नहीं आती।

राधिका मेवाड़ा, कक्षा 8
दूध पीने से ऊर्जा प्राप्त होती है इससे हमारा मस्तिष्क तेज चलता है और हमारा शारीरिक व मानसिक विकास होता है। मैं दूध फीका पीती हूं। दूध पीने से हमारे शरीर का वजन भी बढ़ता है और हड्डियां भी मजबूत होती हैं।

लीला बैरवा, कक्षा 7

ये हैं सरकारी मापदंड
सभी विद्यालयों में योजना का संचालन सरकार द्वारा तय मापदण्ड़ों के आधार पर ही किया जा रहा है। सरकार के नियमानुसार फीका दूध ही बच्चों को पिलाया जाना है, लेकिन अधिकतर बच्चे फीका दूध नहीं पीते है इसलिए उन्हें भामाशाहों की मदद से शक्कर का प्रबंध किया गया है। सरस डेयरी द्वारा अन्नपूर्णा योजना के नाम से अलग से दूध के पैकेट्स आते हैं।

सम्पूर्ण आहार है दूध
दूध के अन्दर कैल्शियम व प्रोटीन होता है। कैल्शियम से हमारे शरीर की हड्डियां मजबूत बनती है। और प्रोटीन से हमारे शरीर को अन्दरूनी ताकत प्राप्त होती है। एक तरह से सम्पूर्ण आहार है दूध। दूध को हमेशा उबालकर ठण्डा करके पीना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर जीवाणु अथवा पैरासाईटल संक्रमण होने का खतरा रहता है।
डॉ. हर्षवर्धन यादव, चिकित्सक राजकीय चिकित्सालय बिजयनगर

जैसा निर्देश मिलेगा, वैसा कार्य होगा
अन्नपूर्णा दूध योजना सरकार द्वारा संचालित योजना है। सरकारी विद्यालय परिसर में संचालित होने वाली आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चों को दूध वितरण के कोई निर्देश नहीं है और इसे लेकर कोई कार्ययोजना भी नहीं है। यदि कोई निर्देश या योजना बनेगी तो सभी को सूचना दी जाएगी।
गोरधनलाल, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, मसूदा

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