अन्नपूर्णा दूध योजना को विस्तार दें

अतिश्योक्ति नहीं कि अन्नपूर्णा दूध योजना से हमारे बच्चे सेहतमंद तो होंगे ही किसान भी आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे। डेयरी उद्योग की संभावनाएं बढ़ेंगी।
सरकारी स्कूलों में अब हमारे बच्चे सप्ताह में तीन दिन दूध का सेवन करेंगे। राजस्थान सरकार की इस अन्नपूर्णा दूध योजना की प्रशंसा की जानी चाहिए। निश्चित ही यह एक अभिनव पहल है। देश के अन्य राज्य भी इस योजना का अनुसरण करे, तो अच्छी बात है। इस योजना को कतई चुनावी नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। देर से ही सही, इस योजना का तत्कालीन लाभ तो नौनिहालों को मिलने लगा है।
सरकार की इस अन्नपूर्णा योजना से कई अन्य योजनाएं समाहित प्रतीत होती हैं। मसलन कि, केन्द्र व राज्य सरकारें किसानों की आय दोगुनी करना चाह रही है।

निश्चित ही, अन्नपूर्णा दूध योजना का लाभ प्रत्यक्ष रूप से किसानों को भी मिलेगा। किसान गाय-भैंस पालकर दूध निकालते हैं और सरस डेयरी को उपलब्ध कराते हैं। अतिश्योक्ति नहीं कि अन्नपूर्णा दूध योजना से हमारे बच्चे सेहतमंद तो होंगे ही किसान भी आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे। डेयरी उद्योग की संभावनाएं बढ़ेंगी। कई बेरोजगार युवक-युवतियां डेयरी उद्योग जैसे स्वरोजगार के लिए प्रेरित होंगे। डेयरी उद्योग से अतिरिक्त आय मिलने पर किसान उद्यानिकी में भी रुचि लेंगे। गाय-भैंस पालने से उपलब्ध गोबर वे खेतों में अच्छी पैदावार के लिए डाल सकेंगे। बहुत संभव है कि किसान जैविक खेती, गोबर गैस प्लांट व वर्मीकम्पोस्ट में रुचि लेकर अपना खर्च कम करते हुए अपनी आय बढ़ाने में दो कदम और आगे बढ़ाए।

निश्चित ही, राजस्थान अब बीमारू राज्य नहीं है। सड़कें बेहतर हुई हैं। बाजार उपलब्ध है। बिजली की स्थिति भी काफी हद तक ठीक है। मोबाइल क्रांति से गांवों के किसानों का जुड़ाव बढ़ा है। वे सोशल साइट्स का इस्तेमाल कर बाजारों में अपनी पैठ बनाने में कामयाब भी हो रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार की अन्नपूर्णा दूध योजना एक सम्पूर्ण योजना है। इस योजना के विभिन्न पहलुओं पर गौर करते हुए इसे विस्तार देने की जरूरत है। एक सटीक कार्ययोजना बनाकर उसे अमलीजामा पहनाया जा सकता है। गहरे अर्थों में इस योजना से न केवल बच्चों की सेहत सुधरेगी, बल्कि इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। अन्नपूर्णा दूध योजना को विस्तार देने की जरूरत है।
जय एस. चौहान

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