सराफ ने किया अन्तरा राज सॉफ्टवेयर का शुभारम्भ

जयपुर। (वार्ता) राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ ने इंजेक्टेबल गर्भ निरोधक साधन अन्तरा इंजेक्शन उपयोगकर्ता महिलाओं की मॉनिटरिंग एवं फॉलोअप के लिए “अन्तरा राज” सॉफ्टवेयर एवं प्रचार-प्रसार पोस्टर का आज यहां शुभारम्भ किया।

श्री सराफ ने विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर इंदिरागांधी पंचायतीराज संस्थान सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय सम्मान समारोह में इनका शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 11 से 24 जुलाई तक प्रदेश में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा आयोजित कर “एक सार्थक कल की शुरूआत-परिवार नियोजन के साथ” का संदेश गांव-गांव और ढ़ाणी-ढ़ाणी तक पहुंचाया जायेगा। इस पखवाड़े के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ता जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता, तरीकों एवं इसके लिए उपलब्ध सुविधाओं के बारे में आमजनता को जानकारी देने के लिये जन-जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जायेगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रत्येक महीने के तीसरे बुधवार को पुरूष नसबंदी दिवस के रूप में आयोजित कर पुरूषों के लिए नसबंदी एवं परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ ही जनसमुदाय में छोटा परिवार-सुखी परिवार की अवधारणा भी विकसित की जा रही है। प्रदेश के 14 जिलों में कुल प्रजनन दर में सुधार लाने के उद्देश्य से “मिशन परिवार विकास” लागू कर नये गर्भनिरोधक साधन “छाया गोली एवं अंतरा इंजेक्शन” उपलब्ध कराये जा रहे हैं।

श्री सराफ ने बताया कि परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत वर्ष 2017-18 में एक लाख 92 हजार से अधिक महिलाओं को गर्भनिरोधक साधन पीपीआईयूसीडी लगायी गयी है। इस दौरान रिकॉर्ड 31 हजार 209 इंजेक्टेबल गर्भनिरोधक साधन अंतरा इंजेक्शन की डोज लगायी गयी है। यह देशभर में सर्वाधिक है। सेम्पल रजिस्ट्रेशन सर्वे 2012 के अनुसार राजस्थान की कुल प्रजनन 2.9 थी, जो अब घटकर एनएफएचएस-4 सर्वे (वर्ष 2015-16) के मुताबिक 2.4 रह गयी है।

उन्होंने कहा कि मातृ मृत्युदर एवं शिशु मृत्युदर कम करने के उद्देश्य से संस्थागत प्रसव बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राजस्थान की मातृ मृत्युदर एसआरएस 2013 के अनुसार 244 थी, जो घटकर सेम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) 2016 के अनुसार 199, शिशु मृत्युदर अब 41 एवं नवजात शिशु मृत्युदर 28 प्रति हजार रह गयी है। इस मौके चिकित्सा राज्य मंत्री बंशीधर खण्डेला ने तेजी से बढ़ती जनसंख्या सम्पूर्ण विश्व के लिए एक चुनौती बताते हुए कहा है कि बढ़ती जनसंख्या के कारण प्रकृति का संतुलन निरन्तर बिगड़ता जा रहा है।

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