धर्म शरणं कभी अमंगल नही हो सकता: प्रमोद मुनि

बिजयनगर। (खारीतट सन्देश) स्थानीय स्वाध्याय भवन में सोमवार को महान तत्व चिंतक श्रद्धेय श्री प्रमोद मुनि जी म.सा. एवं पूज्य श्री योगेश मुनि जी म.सा. ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप सभी आत्मउत्थान के लिये जिनवाणी का रसपान हेतु यहां उपस्थित हुए हो। संसार के समस्त दु:खों से मुक्तियों या छुटकारा पाना है तो सर्वप्रथम चार शरणं स्वीकार करने होंगे। अरिहंत, सिद्ध, केवली प्ररूपित दयामय धर्म, सर्व साधु प्रभू फरमाते है कि आज तक तूने पैसे-परिवार-शरीर की ही शरण स्वीकारी है। उससे तुझे मुक्ति मिलने वाली नही है मंगल तो तेरा उपरोक्त शरण में जाने से ही होगा सर्वप्रथम शरणं स्वीकारते ही तेरी आधी विजय निश्चित है। दुनियां को कोई भी मंगल अमंगल हो सकता है मगर धर्म शरणं कभी अमंगल नही हो सकता।

मंगल क्या हैं?: जो विघ्रों-कष्टों को गलाने का कार्य करें, मंगल दो प्रकार के होते है द्रव्य मंगल, भाव मंगल। अत: प्रात: पौ फटते ही प्रभू का स्मरण ही मंगलकारी है परन्तु आप सुबह उठते ही चाय या आज तो मोबाईल पर वाटसअप् के पीछे लग जाते हो तब फिर मंगल आपका कैसे होगा। ‘चार गरणा, दु:ख हरणा और ना शरणा कोय, जो भवि प्राणी आदरे, अजर-अमर पद होय’।

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