सुखी रहना है तो किसी से अपेक्षा मत रखों: प्रमोद मुनि

बिजयनगर। (खारीतट सन्देश) स्थानीय महावीर भवन में गुरूवार को आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए श्रद्धेय परम पूज्य महान तत्व चिंतक श्री प्रमोद मुनि जी एवं मधुर वक्ता श्री योगेश मुनि जी म.सा. ने फरमाया कि जीवन को संसार के परपंच से उठकर केवल्य की प्राप्ति के लिये प्रेरणा प्रदान करने वाले रत्नाधिक भगवन्तों के चरणों में प्रणाम करते हुए फरमाया आज चर्तुदशी है, कल से चातुर्मास (वर्षावास) चालू होने जा रहा हैं। जीवन में प्रारम्भ नही प्रवास महत्वपूर्ण होता है। किसी भी कार्य के प्रारम्भ में जो जोश हम दिखाते है मात्र इससे लक्ष्य प्राप्ति नही होती अपितु इसे अन्त तक कायम रखना जरूरी है। ‘प्रारम्भ’ में ही नही ठहरना है।

वर्षावास अर्थात् वर्ष भर के लिये आवास-अकबर ने अपने दरबार में प्रश्न किया कि 12 में से 4 निकाल दिये जाये तो क्या शेष बचेगा। सभी ने जवाब अपने-अपने हिसाब से दिये अन्त में बीरबल का जवाब ये था कि ‘शून्य’ पूरी सभा में सन्नाटा छा गया तब बीरबल ने कहा कि बारह महिनों में 4 माह बारिश के निकाल देवे तो बिना पानी के कुछ भी संभव नही। जमाना ही नही होगा। गितिका के माध्यम से आगे फरमाया कि
‘जीव तू जतना कर लीजे, आयो वर्षावास कर्म की करनी कर लीजे’ इन दिनों की उत्पत्ति अधिक होती है इसलिए समस्त जीवों पर रक्षा हो इसके लिए ‘वात्सल्य भाव’ जरूरी हैं।

आगे व्याख्यान देते हुए बताया कि ‘गाय-गुरू-ग्रन्थ’ को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया। श्रम-संयम-सदाचार-शरीर के अभिमान का त्याग ही धर्म हैं। हमें जड़ के प्रति विरक्ति भाव बढ़ानी है ताकि धर्म की अनुरक्ति बढ़े, नहीं तो विराधना की संभावनाएं बढ़ेगी। यह पर्व हमारे जीवन मुक्ति की प्रेरणा प्रदान करने वाला है ‘ जीवन मुक्त कौन है? जो इमानदार है अर्थात् संसार की किसी भी वस्तु को अपना नही मानता। हमारा यह जीव अनादिकाल से पुद्गल’ का मालिक बना बैठा है। जीव और जड़ का मेल अनादिकाल से बना हैं। हमारी यह विचारधारा है (कि अच्छा किया सो हमने बुरा हुआ तो भगवान) कहां तक न्यायोचित है।

धर्म हमारे जीवन का प्राण है हम इसे भूल रहे है हमारे स्वास्थ्य खान-पान सब दूषित हो रहे है इस कारण शाही रोग ‘ब्लड प्रेशर-शुगर-थायराइड’ बढ़ रहे हैं। ‘होटल’ हो सके तो टाले वरना विनाश होगा टोटल और जाना पड़ेगा हॉस्पीटल इसलिए है देवानुप्रियो बाहर का खाना छोड़ो ‘दाल रोटी सबसे मोटी बाकी सब में झंझट मोटी’ जीवन में सुखी रहना है तो किसी से अपेक्षा मत रखों और किसी की उपेक्षा मत करो। धर्म उधार का सौदा नही यह तुरन्त मानसिक शांति प्रदान करने वाला हैं।

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