स्वच्छ भारत अभियान के लिए बजट से इतर 15 हजार करोड़

नई दिल्ली। सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत गाँवों में शौचालयों के निर्माण के लिए चालू वित्त वर्ष में बजट से इतर 15,000 करोड़ रुपये तक देने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आज यहाँ हुई बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। बैठक के बाद विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह राशि नाबार्ड के जरिये सरकारी बांड जारी कर जुटाई जायेगी और मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय पेयजल गुणवत्ता केंद्र नामक सोसाइटी के माध्यम से स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण को दिया जायेगा।

मंत्रिमंडल ने सोसाइटी के कार्यक्षेत्र के विस्तार को भी मंजूरी दी है ताकि उसे मिशन के लिए बजट से इतर कोष स्वीकार करने, राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को उस पैसे के बँटवारे तथा पुनर्भुगतान का अधिकार मिल सके। इस सोसाइटी का नाम भी बदलकर ‘राष्ट्रीय पेयजल, स्वच्छता एवं गुणवत्ता केंद्र’ किया जायेगा। श्री प्रसाद ने बताया कि इससे डेढ़ करोड़ ग्रामीण परिवारों को लाभ होगा जिन्हें शौचालयों के निर्माण के लिए पैसा दिया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि 2014 में देश के ग्रामीण इलाकों में मात्र सात करोड़ शौचालय थे जबकि 02 अक्टूबर 2014 में इस अभियान की शुरुआत के बाद से ग्रामीण भारत में सात करोड़ 94 लाख शौचालय बन चुके हैं। शौचालयों के निर्माण के अलावा इस राशि से ग्राम पंचायतों को ठोस एवं तरल कूड़ा प्रबंधन के लिए भी पैसा दिया जायेगा। इस पैसे का भुगतान नाबार्ड को 10 साल बाद एकमुश्त किया जायेगा। राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की जरूरतों के आँकलन के हिसाब से नाबार्ड राशि जुटायेगा।

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