अनन्त ज्ञान और अनन्त दर्शन इस जीव के निजी गुण है: योगेश मुनि

बिजयनगर। (खारीतट सन्देश) स्थानीय रेल्वे फाटक के पास स्थित महावीर भवन में आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए श्रद्धेय महान तत्चचिंतक श्री प्रमोदमुनि जी एवं मधुर वक्ता श्री योगेशमुनि जी म.सा. ने रत्नाधिक भगवन के चरणों में भाव-भरा वन्दन करने के पश्चात् फरमाया कि जीव के लिए जिनवाणी उद्धार करने वाली है और जिनवाणी के रहस्य को हृदयांगन व सार व आत्मसात् करने के लिए वीतराग भगवन्तों ने इस सत्य को याद रखा कि …..

‘भेजने वाला भटकता नही’ भगवान को हम किस दृष्टि से देख रहे है। सत्य ही भगवान है और भगवान ही सत्य है। हमारी दृष्टि सही तो हम निहाल है और दृष्टि गलत तो बेहाल है, कैसी गौतम संवाद की पहली गाथा ‘स्तुति’ की है उनके गुणों-विशेषताओं की हम सभी स्तुतिकर बने। इस जीव का निजी गुण ‘अनन्त ज्ञान और अनन्त दर्शन है’ यह जीवन खोने और रोने के लिये नही मिला है। पाप धोने के लिये मिला है आवरण, विस्मरण और अपहरण को हटाना है- बस यही मूल समस्या है इसे मिटाने के लिये जीवन मिला है।

श्रद्धेय प्रमोदमुनि जी म.सा. ने अंत में फरमाया कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आज तेजी से घटने वाला धर्म यदि कोई है तो वह है ‘जैन धर्म’ हमें इस पर विचार करना हमारे वेष में जो विचारों में गिरावट आ रही है उसे दूर करने के सुदृढ़ प्रयास करने पड़ेगे तब कही जाकर हम कुछ कर पायेंगे।

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