माटी के लाल थे ‘प्रो. सांवरलाल’

बिजयनगर। प्रो. सांवरलाल जाट जमीन से जुड़े नेता थे। उच्च शिक्षा के बाद नौकरी में रहते हुए राजनीति में आए। राजनीतिक सफर उन्होंने 1990 में जनता दल पार्टी से भिनाय विधानसभा से चुनाव जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी को समर्थन दिया। उसके बाद ढ़ाई साल की अवधि में विधानसभा भंग होने के बाद पुन: भिनाय विधानसभा से भाजपा का टिकट लेकर चुनाव जीता और भैरोसिंह शेखावत सरकार में मंत्री बने। अपने राजनीतिक जीवन में कुल 6 बार विधायक का चुनाव लड़े जिसमें 5 बार विधायक निर्वाचित हुए। 4 बार भिनाय विधानसभा क्षेत्र से और एक बार नसीराबाद विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए। इस दौरान 2 बार केबिनेट मंत्री बने। 2014 में अजमेर सांसद का चुनाव लड़ा जिसमें निर्वाचित होने पर नरेन्द्र मोदी सरकार में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री बने। इस पद पर दो साल रहे। अस्वस्थ होने के कारण इस्तीफा दे दिया। उसके बाद पार्टी ने उनको वर्ष 2016 में राजस्थान किसान आयोग का अध्यक्ष बनाकर नई जिम्मेदारी सौंपी जिसमें उनको केबिनेट स्तर का दर्जा प्राप्त था। 9 अगस्त 2017 को उनका देहांत हो गया।
स्व. प्रो. सांवरलाल जाट का संक्षिप्त परिचय
जन्म स्थान : गोपालपुरा (भिनाय) जिला-अजमेर (राज.)
प्रारम्भिक शिक्षा : राजकीय विद्यालय सिंगावल (अजमेर)
माध्यमिक शिक्षा : श्री गांधी उमावि, गुलाबपुरा (भीलवाड़ा)
स्नातक : श्री प्राज्ञ महाविद्यालय, बिजयनगर (अजमेर)
स्नातकोत्तर : राजकीय महाविद्यालय, अजमेर (एम.कॉम)
नौकरी : डेयरी में सुपरवाईजर पद पर बिजयनगर और केकड़ी में।
नौकरी : व्याख्याता पद पर राजकीय महाविद्यालय अजमेर, बारां, सांभर और राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में।
प्रो. सांवरलाल जाट जितना कद्दावर नेता थे उतना ही सहृदयवाला मिलनसार इंसान भी। राजनीति में रहते हुए उन्होंने राजनीति में पद की गरिमा बनाए रखते हुए जमीन से ताउम्र जुड़े रहे। राजनीतिक जीवन में उन्होंने यही अर्जित किया। क्षेत्र के विकास में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। तभी तो वे क्षेत्र के लोगों को बहुत याद आते हैं…।
क्षेत्र के विकास में प्रो. जाट का योगदान
भिनाय, बिजयनगर सहित अजमेर जिले के अधिकतर गांवों, कस्बों में बीसलपुर पेयजल परियोजना को लाने का श्रेय स्व. प्रो. सांवरलाल जाट को ही जाता है। इसी वजह से प्रो. जाट को भागीरथी की उपमा दी गई थी। क्षेत्र सहित पूरे राजय में पेयजल योजना को शीघ्र उपलब्ध कराने में प्रो. जाट ने अथक प्रयास किए थे। इससे पूर्व जिले के अधिकतर गांवों और कस्बों में मार्च माह के बाद से जुलाई माह तक भयंकर पेयजल की किल्लत रहती थी। पहले बिजयनगर कस्बे में रेलगाड़ी के जरिए बीसलपुर का पानी नसीराबाद से लाने की व्यवस्था थी, लेकिन फिर भी हालात सामान्य नहीं होने पर प्रो. सांवरलाल जाट ने जी-जान से बीसलपुर पाइप लाइन लाने के प्रयास कर बिजयनगर सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों की प्यास बुझाई। इसके अलावा श्री प्राज्ञ महाविद्यालय में सांसद फण्ड से एक भवन का निर्माण कराया गया। प्रो. जाट को किसानों को मसीहा भी कहा जाता था, क्योंकि जाट स्वयं एक किसान परिवार से थे। इसलिए किसानों की समस्या और उनका दर्द बारीकी से समझते थे और किसानों के दु:ख-दर्द दूर करने में हमेशा प्रयासरत रहते थे। इसी वजह से ही सरकार ने राजस्थान राज्य के किसान आयोग की जिम्मेदारी सौंप रखी थी।
क्षेत्रवासियों से लगाव व सामंजस्य
प्रो. सांवरलाल जाट का सभी लोगों से अच्छा सामंजस्य था। वो अपने क्षेत्र के लोगों के हर सुख-दु:ख में शामिल होते थे। वे हर वर्ग और हर उम्र के लोगों के साथ हिलमिल के चलते थे। पूरे अपनत्व के साथ किसी से मिलते थे। उन्होंने कभी भी किसी को अपने से छोटा नहीं माना। यही कारण है कि आज प्रो. साहब हम लोगों के साथ नहीं हैं लेकिन फिर भी सभी उनको आज भी साहब कहकर याद करते हैं। प्रो. सांवरलाल जब अध्ययनरत थे तब वो अपने शिक्षक के सबसे प्रिय छात्र होते थे। उनके सभी दोस्त उनसे सीखकर आगे बढ़ा करते थे। आज प्रो. सांवरलाल जाट नहीं हैं, लेकिन लोगों को उनके द्वारा किए गए कल्याणकारी कार्य आज भी याद हैं।
सपना जो अधूरा रह गया
प्रो. सांवरलाल जाट को अपने क्षेत्र सहित पूरे जिले की चिंता हमेशा रहती थी उनका सोचना था कि यदि कभी वर्षा कम हुई तो मेरे जिले के लोग पेयजल की व्यवस्था कैसे करेंगे और किसान भाई अपने जानवरों को कहां से पानी लाकर पिलाएंगे। इसलिए उन्होंने एक प्रयास शुरू किया था कि चम्बल नदी का पानी लाकर बीसलपुर बांध में डाला जाए ताकि कभी भी बीसलपुर बांध खाली न रहे। लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया। इससे पहले ही वो हम सबको आकस्मिक हमेशा-हमेशा के लिए छोड़कर चले गए।
मेरे राजनीतिक गुरु
मेरे राजनीतिक गुरु प्रो. सांवरलालजी जाट ही थे। जबसे से मैं साहब के सम्पर्क में आया तब से लेकर आज तक (उनके देहांत के बाद तक) मैं उनके परिवार का सदस्य की तरह हूँ। साहब जैसा जुझारू किसान नेता अब शायद ही कोई आए। उन्होंनें जिले के छोटे-छोटे गांवों को भी बीसलपुर पेयजल परियोजना से जोड़कर कई लोगों का उद्धार किया है। साहब ने एक बार मुझसे कहा था अच्छा राजनेता वो होता है जो जनता के बीच रहता है।


बालचन्द लोढ़ा, पूर्व पार्षद, सदस्य दूरसंचार सलाहकार समिति अजमेऱ
यह कहते है उनके सखा
मैं और प्रो. सांवरलाल जाट साहब 9वीं से जीसीए में साथ-साथ पढ़े हैं। मैं वहां तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स कर रहा था उसी दौरान सांवरलालजी राजकीय महाविद्यालय में व्याख्याता बनकर आ गए। मैंने उनको बोला यार मेरी तो पढ़ाई ही पूरी नहीं हुई और तुम लेक्चरर भी बनकर आ गए। प्रो. सांवरलाल जाट गांधी स्कूल और प्राज्ञ कॉलेज में टॉपर रहे। राजकीय महाविद्यालय अजमेर में भी उन्होंनें एम.कॉम टॉप किया था। प्रो. जाट शुरू से ही बहुत व्यवहार कुशल थे।


रामस्वरूप माली, गुलाबपुरा
मैं प्रो. सांवरलाल जाट के साथ श्री प्राज्ञ महाविद्यालय में तीन वर्षों तक पढ़ा था। दोस्तों के प्रति उनका व्यवहार बहुत अच्छा था। थोड़ा कम ही बोलते थे। वो जब पहली बार चुनाव में खड़े हुए थे तब उनकी पार्टी का कार्यालय मेरे घर के सामने ही खुला था। रोजाना उनसे मिलना और बात करना होता था। उन्होंने मुझे भी राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया लेकिन उस समय ऐसी मेरी कोई इच्छा नहीं थी इसलिए मैंने मना कर दिया। वे जब भी मिलते थे सुख-दु:ख की बातें किया करते थे।


अशोक गोयल, बिजयनगर
हम दोनों गांधी स्कूल गुलाबपुरा में साथ-साथ पढ़ते थे। जाट साहब बहतु ही व्यवहार कुशल थे। वे हमें बहुत कुछ सिखाते थे पढ़ाई के मामले में। अंग्रेजी पढ़ाने के लिए टीचर आए थे जॉन इंफिल्ड सर। वे जाट साहब और हम लोगों से घुल-मिल गए थे। मैं जब लायंस क्लब में डायरेक्टर पद पर था तब मेरे और शांतिलाल चपलोत के अनुरोध पर उन्होंने बिजयनगर में कैम्प लगवाने के आदेश दिलवा दिए। दोस्त की तरह की मिलते थे।


मूलचन्द नाबेड़ा, बिजयनगर
सांवरलाल जाट बहुत ही सीधे और साधारण स्वभाव के व्यक्ति थे। छात्र जीवन से ही काफी कुशाग्र थे। हम लोगों को परीक्षा की तैयारी भी करवाते थे। हम सभी दोस्त एक-दूसरे की खूब मदद करते थे। वे भी हरसंभव मदद किया करते थे। बालसखा सांवरलाल जाट जब भी आते मिलकर जाते थे। मैं अंतिम बार उससे मिलने डेढ़ साल पहले उसकी बेटी के जामणे की सीख में गया था। काफी देर तक घर-गृहस्थी की बात हुई। उनकी एक अच्छी आदत थी वो फिजुलखर्ची कभी नही करते थे।


जीवतराम मेठानी, गुलाबपुरा

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