जानें क्यों किया जाता है रुद्राभिषेक

भगवान शिव एक लोटा जल से भी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं। शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। वहीं रुद्राभिषेक करने से व्यक्ति की कुंडली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भस्म हो जाते हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है। हमारे शास्त्रों में विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक के पूजन के निमित्त अनेक द्रव्यों तथा पूजन सामग्री को बताया गया है। विशेष अवसर पर या सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि आदि पर्व के दिनों में मंत्रों, दूध, दही आदि से भी अभिषेक किया जाता है।

विशेष पूजा में दूध, दही, घृत, शहद और चीनी से अलग-अलग अथवा सबको मिलाकर पंचामृत से भी अभिषेक किया जाता है। इस प्रकार विविध द्रव्यों से शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करने पर अभीष्ट कामना की पूर्ति होती है। वहीं रुद्राभिषेक से कालसर्प योग, गृहक्लेश, व्यापार में नुकसान, शिक्षा में रुकावट सभी कार्यों की बाधाएं भी दूर होती हैं।

कब से शुरू हुआ रुद्राभिषेक: प्रचलित कथा के अनुसार भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई। ब्रह्माजी जब अपने जन्म का कारण जानने के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंचे, तो उन्होंने ब्रह्मा की उत्पत्ति का रहस्य बताया और यह भी कहा कि मेरे कारण ही आपकी उत्पत्ति हुई है। परन्तु ब्रह्माजी यह मानने के लिए तैयार नहीं हुए और दोनों में भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध से नाराज भगवान रुद्र लिंग रूप में प्रकट हुए। इस लिंग का आदि अन्त जब ब्रह्मा और विष्णु को कहीं पता नहीं चला, तो उन्होंने हार मान ली और लिंग का अभिषेक किया, जिससे भगवान प्रसन्न हुए। कहा जाता है कि यहीं से रुद्राभिषेक का आरम्भ हुआ।

एक अन्य कथा के अनुसार: एक बार भगवान शिव सपरिवार वृषभ पर बैठकर विहार कर रहे थे। उसी समय माता पार्वती ने मर्त्यलोक में रुद्राभिषेक कर्म में प्रवृत्त लोगो को देखा तो भगवान शिव से जिज्ञासा कि की हे नाथ, मृत्युलोक में इस इस तरह आपकी पूजा क्यों की जाती है? तथा इसका फल क्या है? भगवान शिव ने कहा – हे प्रिये! जो मनुष्य शीघ्र ही अपनी कामना पूर्ण करना चाहता है वह आशुतोष स्वरूप मेरा विविध द्रव्यों से विविध फल की प्राप्ति हेतु अभिषेक करता है। जो मनुष्य शुक्लयजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी से अभिषेक करता है, उससे मैं प्रसन्न होकर शीघ्र मनोवांछित फल प्रदान करता हूं। जो व्यक्ति जिस कामना की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक करता है, वह उसी प्रकार के द्रव्यों का प्रयोग करता है।

रुद्राभिषेक से क्या क्या लाभ मिलता है: शिव पुराण के अनुसार, किस द्रव्य से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है अर्थात आप जिस उद्देश्य की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक करा रहे है उसके लिए किस द्रव्य का इस्तेमाल करना चाहिए का उल्लेख शिव पुराण में किया गया है उसका सविस्तार विवरण प्रस्तुत कर रहा हू और आप से अनुरोध है की आप इसी के अनुरूप रुद्राभिषेक कराएं, तो आपको पूर्ण लाभ मिलेगा।

कुशा जल से अभिषेक करने पर – रोग, दुःख से छुटकारा मिलती है।
दही से अभिषेक करने पर – पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होती है।
गन्ने के रस से अभिषेक करने पर – लक्ष्मी प्राप्ति होती है।
मधु युक्त जल से अभिषेक करने पर – धन वृद्धि होती है।
तीर्थ जल से अभिषेक करने पर – मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इत्र मिले जल से अभिषेक करने से – बीमारी नष्ट होती है ।
दूध से अभिषेक करने से – पुत्र प्राप्ति, प्रमेह रोग की शांति और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
गंगाजल से अभिषेक करने से – ज्वर ठीक हो जाता है।
दूध शर्करा मिश्रित अभिषेक करने से – सद्बुद्धि मिलती है।
घी से अभिषेक करने से – सद्बुद्धि वंश विस्तार होता है।
सरसों के तेल से अभिषेक करने से – रोग और शत्रु का नाश होता है।
शुद्ध शहद रुद्राभिषेक करने से – पाप क्षय होते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Skip to toolbar