… अब पानी नाक से ऊपर

एक के ऊपर एक पांच मंजिल बन गए, लेकिन नगर पालिका प्रशासन को ‘कानोंकान’ खबर तक नहीं लगी। उस पर तुर्रा यह कि निर्माणाधीन भवन नगर पालिका कार्यालय से महज कुछ मीटर की दूरी पर है। प्रतिदिन यहां से दर्जनों जनप्रतिनिधि व अधिकारी आते-जाते हैं।
यूं तो देश के दक्षिणी राज्य केरल में बाढ़ आई हुई है लेकिन बिजयनगर नगर पालिका क्षेत्र में भ्रष्टाचार का पानी अब ‘नाक’ से ऊपर बहने लगा है। भ्रष्टाचार की इस ‘गंगोत्री’ में रसूखदारों की पौ-बारह है। हालात यह है कि रसूखदारों के आगे नगर पालिका प्रशासन दंडवत खड़ा है। रसूखदारों के आगे सड़क किनारे ठेले-खोमचे लगाने वालों पर हेंकड़ी बघारने वालों की घिघ्घी बंध जाती है। बानगी तो देखिए, नियम-विरुद्ध भवन बनाने वाले को नगर पालिका प्रशासन ने नोटिस दिया तो दिन के बजाय रात में निर्माण कार्य शुरू हो गया। एक के ऊपर एक पांच मंजिल बन गए, लेकिन नगर पालिका प्रशासन को ‘कानोंकान’ खबर तक नहीं लगी।

उस पर तुर्रा यह कि निर्माणाधीन भवन नगर पालिका कार्यालय से महज कुछ मीटर की दूरी पर है। प्रतिदिन यहां से दर्जनों जनप्रतिनिधि व अधिकारी आते-जाते हैं। फिर भी निर्माणाधीन इस पांच मंजिले भवन के बढ़ते कद को किसी ने नहीं देखा। दो मंजिल अधिक बन गए और किसी को इसका पता नहीं चला। शहर में इससे हैरत की बात और क्या होगी? क्या नगर पालिका प्रशासन का कोई खुफिया तंत्र (मुखबिर) नहीं है। यदि मुखबिर नहीं है तो नगर पालिका के दूर-दराज वाले क्षेत्र में क्या होता होगा। इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

… और यदि मुखबिर है तो शहर की आम जनता से ऐसा मजाक क्यों? नि:संदेह यह जनता के विश्वास पर कुठाराघात है। हैरत की दूसरी बात यह कि नगर पालिका प्रशासन पर शिकायतों की ‘पिचकारी’ लेकर तत्पर रहने वाले विपक्ष के जनप्रतिनिधि भी इस मामले में ‘अनजान’ बनने का नकाब ओढ़ लिया। इस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष की खामोशी बहुत कुछ ‘बयां’ करती है। दोनों पक्षों को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इस मुद्दे पर कई ऐसे सवाल है जिनका जनता हिसाब मांगती है।

जय एस. चौहान

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