गोलमाल है भई, गोलमाल है!

बिजयनगर नगर पालिका में सब कुछ संभव है। लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई शहर की सरकार में लालफीताशाही जोरों पर है। प्रतिपक्ष ही नहीं सत्तापक्ष के पार्षदों की भी आवाज का गला घोंटा जा रहा है। इससे अधिक ताज्जुब और क्या होगा कि 12 जुलाई को साधाराण सभा की बैठक में जिन मुद्दों पर बहस हुई उन तथ्यों को प्रोसेडिंग से ही गायब कर दिया गया। इससे पार्षद न सिर्फ आहत हैं बल्कि अब मुखर भी होने लगे हैं…।
बिजयनगर। स्थानीय नगरपालिका बोर्ड में सब गोलमाल चल रहा है ऐसा लगता ही नहीं कि यह एक सरकारी संस्था है। यहां सब कुछ मनमाने तरीके से चल रहा है और आम आदमी के कामकाज के लिए जहाँ उन्हें चप्पल घिसनी पड़ रही है वहीं नियम विरुद्ध काम करने वालों की पौ-बारह है। यह आरोप खुद कांग्रेस के पार्षद सहित विपक्ष के पार्षद भी लगा रहे हैं। इसके बावजूद नगरपालिका में नित नए काण्ड उजागर हो रहे हैं।

ताजा मामला गत साधारण सभा की कार्यवाही रिपोर्ट का है जिसकी प्रति पार्षदों के हाथ में आते ही वे भौंचक्के रह गए। पार्षदों को इस बात का मलाल साल रहा है कि साधारण सभा में जो उन्होंने बोला और जो प्रस्ताव उन्होंने सदन में रखे और पारित हुए उनका जिक्र कार्यवाही रिपोर्ट से गायब है। एक पार्षद ने तो इसकी शिकायत उच्च स्तर पर कर भी दी है। वहीं अन्य पार्षद मामले को लेकर पालिका अध्यक्ष सचिन सांखला की मुखालफत में उतर गए हैं। गत साधारण सभा की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि पिछले आठ माह से जिन ठेकेदार ने भी निर्धारित समयावधि में काम नहीं किया उसे पालिका की काली सूची में डाल दिया जाए लेकिन मामले में पार्षदों का आरोप है कि ठेकेदार लॉबी पालिका प्रशासन पर इस कदर हावी हो चुकी है कि अब कार्यवाही रिपोर्ट भी मनमाने तरीके से तैयार होने लगी है। ठेकेदार घटिया और गुणवत्ता रहित निर्माण सामग्री का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में पालिका प्रशासन का करोड़ों के विकास कार्यो का दावा खोखला साबित हो रहा हैं। इस मामले को ‘खारीतट सन्देश’ ने मामले को खंगाला तो पार्षदों ने बेबाक होकर अपनी राय जाहिर की। पेश है पार्षदों की खारीतट सन्देश से बातचीत

बैठक मे लिए गए निर्णयों और जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई मांग को प्रोसेडिंग में न लेकर पार्षदों की भावनाओं को यदि इसी तरह निरन्तर ठेस पहुंचाई जाएगी तो इस बारे में अधिशाषी अधिकारी से बात करेंगे और हम सभी पार्षद मिलकर इसका विरोध करेंगे। यदि ऐसा ही जारी रहता है तो यह पार्षदों और सदन का अपमान हैं। मामले में अध्यक्ष महोदय को चाहिए कि वे जवाबदेही तय करें।
सहदेवसिंह कुशवाह, उपाध्यक्ष-नगरपालिका, बिजयनगर

जो मुद्दे साधारण सभा में उठाए जाते हैं उन्हें प्रोसेडिंग रिपोर्ट में दर्ज नहीं करना नियम विरुद्ध है। नियम तो यह है कि साधारण सभा के तुरन्त बाद पार्षदों के हाथ में प्रोसेडिंग रिपोर्ट की प्रति आ जानी चाहिए लेकिन यहाँ तो महीने भर बाद आती है जो सरासर गलत है।
जगदीशसिंह राठौड़, नेता-प्रतिपक्ष- नगरपालिका, बिजयनगर

प्रोसेडिंग रिपोर्ट एजेण्डे के मुताबिक ही तैयार की गई है। इसमें अन्य बातों का उल्लेख नहीं होता।
ललितसिंह राठौड़, अधिशाषी अधिकारी, न.पा., बिजयनगर

भाईसाहब, यहां तो सब गोलमाल है…
मैंने मेरे वार्ड 8 में वाल्मिकी समाज के लोगों की मांग पर सदन में यह प्रस्ताव रखा की वाल्मिकी समाज के सामुदायिक भवन के लिए गणेश मन्दिर के पीछे स्थित खाली भूखण्ड पर पिल्लर लगाकर छत डाल दी जाए। हैरत तो तब हुई जब मेरे हाथ में जो प्रोसेडिंग रिपोर्ट आयी उसमें उक्त प्रस्ताव न होकर यह उल्लेख था कि पार्षद ने अम्बेडकर भवन की छत की मरम्मत का प्रस्ताव रखा है। जिस जगह की मैंने बात की वहां छत ही नहीं है। ऐसे मे मरम्मत का तो सवाल ही नहीं है भाईसाहब, यहां तो सब गोलमाल चल रहा हैं।
नौशाद मोहम्मद, पार्षद-वार्ड 8

साधारण सभा की ऐसी बैठक में जाने का औचित्य ही क्या है जहाँ पार्षद जनहित में कोई प्रस्ताव ले और उस प्रस्ताव का जिक्र प्रोसेडिंग रिपोर्ट से ही गायब हो जाए।
संजय शर्मा, पार्षद-वार्ड 18

मैंने सदन में मेरे वार्ड की जर्जर सड़क के निर्माण के मामले में ठेकेदार के खिलाफ निर्धारित समयावधि में काम नहीं करने की शिकायत की थी। अब जब मेरे हाथ साधारण सभा की प्रोसेडिंग रिपोर्ट आई है उसमें उसका जिक्र तक नहीं है। इससे पहले की साधारण सभा में मैंने एक ही टेंट मालिक को पालिका द्वारा बार-बार ठेका देने का मामला सदन में उठाया था। इसका जिक्र पिछली कार्यवाही रिपोर्ट में नहीं था। अब तो पार्षदों को यह सोचना होगा कि जनता के हित के लिए आहूत होने वाली साधारण सभा की बैठक में वे जाएं भी या नहीं। मैंने मामले को लेकर राजस्थान जनसम्पर्क पोर्टल पर शिकायत भी की है।
सुशीला सेन, पार्षद-वार्ड-22

नगरपालिका में सब नियम कानून ताक में रखकर काम हो रहे है। यहां तक कि साधारण सभा की प्रोसेडिंग रिपोर्ट पार्षदों को डेढ़-डेढ़ माह के अंतराल में दी जा रही है। ऐसे में आप ही सोचिए कि साधारण सभा में लिए गए प्रस्तावों को अमल में लाने के लिए पालिका प्रशासन को कितना समय चाहिए? साधारण सभा की बैठक पालिकाध्यक्ष की सदारत में होती है ऐसे में प्रोसेडिंग में पालिकाध्यक्ष का उल्लेख जगह-जगह होता है लेकिन अभी जो प्रोसेडिंग रिपोर्ट हमें मिली है उसमें जगह-जगह अधिशासी अधिकारी का हवाला दिया हुआ हैं। पालिका में अब पानी नाक के ऊपर बहने लगा है।
भवानीशंकर राव, पार्षद वार्ड 19

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