नोटबंदी देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा नकारात्मक कदम था: पायलट

जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने नोटबंदी के बाईस महिने बाद आरबीआई द्वारा दिये गये आंकड़ों के खुलासे पर कहा कि भाजपा सरकार का यह निर्णय भारत की अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिगामी साबित हुआ है। श्री पायलट ने आज नोटबंदी पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज से 22 महिने पहले यह फैसला लिया था उस दिन दावा किया गया था कि इससे कालेधन एवं नकली मुद्रा, आतंकवाद में इस्तेमाल होने वाली मुद्रा एवं भ्रष्टाचार पर नियंत्रण होगा, परन्तु आरबीआई द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से स्पष्ट हुआ है कि उक्त चारों दावे खोखले साबित हुए हैं और सरकार की इस अदूरदर्शी नीति एवं हठधर्मिता के कारण देश की अर्थव्यवस्था को लगभग 1.5 प्रतिशत का नुकसान हुआ है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने दावा किया था कि उस समय जितनी मुद्रा चलन में थी उसमें से 3 से 4 लाख करोड़ रूपये कालाधन है जो नोटबंदी के कारण बाहर आ जायेगा, परन्तु 99.3 प्रतिशत पुराने नोट बैंकों में जमा हो चुके हैं जो सरकार के इस दावे को गलत साबित करता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर लगाम लगने के स्थान पर आतंकवादी घटनाओं में अप्रत्याशित इजाफा हुआ है और जहां 2016 में 155 आतंकी घटनायें हुई थी, 2018 में बढ़कर 191 हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का दावा था कि नोटबंदी से डिजीटल ट्रांजिक्शन की प्रवृत्ति बढ़ेगी, परन्तु इस प्रवृत्ति में कोई खास इजाफा नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि सरकार का दावा था कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, परन्तु सरकार ने खुद भ्रष्टाचार को संस्थागत किया है और देश के खजाने एवं जनता के पैसे को चूना लगाकर भागने वाले भगौड़ों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस समय नोटबंदी की घोषणा की गई थी उस समय 15.41 लाख करोड़ रूपये के नोट चलन में थे, इसमें से 15.31 लाख करोड़ रूपये बैंकों में जमा हो गये हैं और मात्र 10,720 करोड़ रूपये वापस नहीं लौटे हैं जिसके बारे में भी यह माना जा रहा है कि उक्त राशि भूटान एवं नेपाल जैसे देशों में होने की वजह से अब तक जमा नहीं हो पाई है।

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के कारण 15 करोड़ श्रमिकों की आजीविका प्रभावित हुई है और लघु एवं मध्यम उद्योग पूरी तरह चौपट हो गये हैं, जो कृषि के साथ भारत की अर्थव्यवथा की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि नोट बदलाने के दौरान कतारों में खड़े होने से 100 से ज्यादा मौतें हुई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा नये नोटों की छपाई में खर्चे में पिछले वर्ष की तुलना में 133 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई।

श्री पायलट ने कहा कि नोटबंदी के समय सरकार का एक ओर दावा था कि इससे बचत की प्रवृत्ति बढ़ेगी, जबकि इसके विपरीत आम जनता में मुद्रा के प्रति विश्वास घटने से बचत की प्रवृत्ति को आघात पहुंचा है, जो इस बात से साबित होता है कि बैंकों में जमा राशि में 2016 से 2018 के बीच में 15 हजार करोड़ रूपये की कमी आई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह भी दावा किया था कि चलन में बड़ी करेन्सी के नोट बंद हो जायेंगे, परन्तु ऐसा देखने को नहीं मिला है।

उन्होंने कहा कि नकली नोट पहले की तुलना में ज्यादा पाये गये हैं जिसमें दो हजार रूपये के नकली नोट 28 गुना ज्यादा पकड़े गये हैं, इसी क्रम में 50 के नकली नोट 154 प्रतिशत बढ़े हैं और 100 रूपये के नकली नोटों में 35 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और 500 रूपये के नकली नोट लगभग 55 गुना ज्यादा पकड़े गये हैं। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का भाजपा सरकार का यह फैसला भारत के राजनीतिक व आर्थिक इतिहास में काले अध्याय के रूप में अंकित हो गया है जिसके कारण भारत की अर्थव्यवस्था को सरकारी नीति के कारण आर्थिक आघात पहुंचा है।

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