तारीख पर तारीख लेने की प्रवृत्तियों से बचें वकील: कोविंद

नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने आम लोगों को न्याय मिलने में होने वाली देरी पर गम्भीर चिंता जताते हुए सम्पूर्ण वकील बिरादरी से अपील की है कि वे ‘तारीख पर तारीख’ लेने की प्रवृत्तियों से बचें।

श्री कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए शनिवार को कहा कि न्याय मिलने में देरी भारतीय न्यायिक प्रणाली के लिए अभिशाप है। उन्होंने हालांकि उम्मीद जतायी कि कानूनी पेशे से जुड़ी सम्पूर्ण बिरादरी सुनवाई के दौरान बेवजह तारीख पर तारीख लेने की प्रवृत्ति से बचेगी। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में ही सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि देश की विभिन्न अदालतों में करीब तीन करोड़ 30 लाख मुकदमे लंबित हैं, जिनमें से दो करोड़ 84 लाख मुकदमे अधीनस्थ अदालतों में हैं। करीब 43 लाख मुकदमे उच्च न्यायालयों में और 58 हजार उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं।

उन्होंने कहा कि मुकदमों के निपटारे में देरी के लिए एक नहीं, बल्कि कई कारण हैं। उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचनाओं का अभाव और खासकर अधीनस्थ अदालतों में बड़ी संख्या में रिक्तियां इसकी प्रमुख वजह हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय प्रणाली की दुनिया में पहचान वंचितों और गरीबों को न्याय दिलाने के लिए होती रही है, लेकिन बार-बार तारीखें लेने की बढ़ती परम्परा से इस बारे में अब धीरे-धीरे सोच बदलने लगी है। राष्ट्रपति ने देश में कानूनी पेशे की बदलती तस्वीर का उल्लेख करते हुए कहा, “ चूंकि भारतीय अर्थव्यवस्था के द्वार खुले हैं, इसलिए वाणिज्य, व्यापार एवं प्रौद्योगिकी कानून को भी नया आयाम मिला है। इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले वकीलों की मांग बढ़ी है। इन क्षेत्रों में कानूनी पढ़ाई को भी बल मिला है।”

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