क्षमा मांगने व करने का पर्व है पर्युषण

पर्वाधिराज पयुर्षण पर्व आज से
बिजयनगर। (जी.सी जैन) श्वेताम्बर जैन समाज का आध्यात्मिक धर्म आराधना का पर्व, आत्मशुद्धि का पर्व, कर्मो की निर्जरा का पर्व, जाने अथवा अनजाने में हुई भूलों, गलतियों की आलोचना, निन्दा, गर्हा, प्रतिक्रमण करने व मिच्छामि दुक्कड़म देने का पर्व क्षमा मांगने तथा क्षमा करने का पर्व जो पयुर्षण पर्व के रूप में जाना जाता है। यह पर्व इस वर्ष 6 से 13 सितम्बर 2018 तक मनाया जा रहा है।

इन दिनों में धर्म आराधना व तप आराधना करते हुए संवत्सरी महापर्व की 13 सितम्बर को विशेष तप आराधना करते हुए 14 सितम्बर को सभी आराधक एक-दूसरे से क्षमा याचना करेंगे। इस पर्व को बिजयनगर में तत्व चिंतक पूज्य प्रमोद मुनि म.सा. आदि ठाणा 4 के सान्निध्य में मनाया जाएगा। इन आठ दिनों में सुबह-शाम प्रतिक्रमण करेंगे तथा महावीर भवन में विशेष प्रवचन होंगे। इन प्रवचनों को सुनने के लिए न केवल जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं ही आते हैं अपितु अन्य सभी समाज के लोग भी पधारकर सुनने के लिए लालायित रहते हैं। प्रवचनों में सैकड़ों की संख्या में लोग पधारते हैं और जिनवाणी को सुनकर अपने जीवन को पवित्र करने की शिक्षाएं ग्रहण करते हैं। प्रवचन का समय सुबह 08:30 से 11 बजे तक रहता है।

भगवान महावीर स्वामी की मूल शिक्षा अहिंसा का पालन, झूठ नहीं बोलना, चोरी नहीं करना, ब्रह्मचर्य व सदाचार का जीवन जीना तथा धन वैभव पर मूच्र्छा भाव नहीं रखना व अपरिग्रह का पालन करना आदि के बारे में उपदेश होते हैं। पापों से बचने व मर्यादित जीवन जीने की कला बताई जाती है। मानव के दु:ख दूर करने व जीवन में सुख शान्ति प्राप्त करने के बारे में गुरु धर्मोपदेश देते हैं।

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