सेहत के लिए बरतें सावधानी

दिनचर्या में आहार और विहार जिसका जैसा होगा सेहत उसकी वैसी ही होगी। दिनचर्या में प्रकृति से दिनोंदिन बढ़ रही दूरी का प्रतिकूल असर लोगों के सेहत पर भी पड़ा है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। विकास की कीमत तो चुकानी ही पड़ती है।
– जय एस. चौहान –
मौसम का मिजाज बदल रहा है। इन बदलते मौसम का सबसे अधिक असर स्वास्थ्य पर ही पड़ता है। अस्पतालों में मरीजों की कतार इसके गवाह हैं। लोगों की दिनचर्या और रहन-सहन कुछ इस तरह हो गए है कि मौसम में थोड़ा सा बदलाव भी सेहत पर प्रतिकूल असर डालती है। दिन और रात के तापमान में अत्यधिक अंतर के कारण भी लोग इन दिनों बीमार पड़ रहे हैं। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतना भी उपचार के समान है।

बीमार होकर उपचार कराने से बेहतर है कि दिनचर्या में बदलाव लाकर या फिर कुछ परहेज कर बीमार होने से बचा जा सकता है। सेहत के लिए कुछ परहेज करना कोई बड़ी कीमत नहीं है। दिनचर्या में आहार और विहार जिसका जैसा होगा सेहत उसकी वैसी ही होगी। जैन मुनि इस पर ज्यादा जोर देते हैं। दिनचर्या में प्रकृति से दिनोंदिन बढ़ रही दूरी का प्रतिकूल असर लोगों के सेहत पर भी पड़ा है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। विकास की कीमत तो चुकानी ही पड़ती है। जाहिर है, बिजली जरूरी तो है लेकिन कई अवसरों पर नुकसान भी करती है। गर्मी में कूलर व पंखे जहां सुकून देते हैं वहीं तापमान में बड़े अंतर में यही पंखे-कूलर लोगों को बीमार करते हैं। खासकर, बच्चों को इन दिनों पंखे-कूलर की हवा से दूर ही रखना चाहिए।

स्थानीय राजकीय चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी होने से लोग बीमार भी कम पड़ेंगे, यह सोचना बेमानी है। चिकित्सालयों, स्कूलों सहित कई अन्य सरकारी विभागों में स्टाफ की कमी का रोना तो अब लोगों को छोड़ ही देना चाहिए। अब यही हमारी नियति बन गई है। बेहतर है कि चिकित्सालयों के चक्कर लगाने और अस्वस्थ होने से बेहतर है मौसम के साथ ही अपनी दिनचर्या, आहार और विहार में भी बदलाव करें। यह भी एक उपचार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Skip to toolbar