कूटनीतिक विफलता के लिए इमरान सरकार जिम्मेदार

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के दो मुख्य विपक्षी दलों ने भारत से संबंध सुधारने में जल्दबाजी दिखाने के लिए इमरान सरकार को घेरा है और कूटनीतिक विफलता के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री खान को पूरी तैयारी के बाद ही भारत को वार्ता के लिए आमंत्रित करना चाहिए था। इमरान ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आतंकवाद और कश्मीर के मुद्दे पर द्विपक्षीय वार्ता शुरू करने का निमंत्रण दिया था।

शुरुआत में भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी की मुलाकात के लिए हामी भर दी थी। लेकिन जम्मू-कश्मीर में तीन जवानों की हत्या और पाकिस्तान द्वारा आतंकी बुरहान वानी पर डाक टिकट जारी किए जाने के बाद भारत ने यह वार्ता रद कर दी। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने इस मामले में पाक की कूटनीतिक विफलता का ठीकरा पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की नवनिर्वाचित सरकार पर फोड़ा है। पूर्व विदेश मंत्री और पीएमएल-एन के सांसद ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा, ‘प्रधानमंत्री द्वारा दिखाई गई उत्सुकता के कारण हमारा पक्ष कमजोर हुआ।’

उन्होंने यह भी कहा कि वह भारत से बेहतर संबंधों के विरोधी नहीं है लेकिन देश की गरिमा बनी रहनी चाहिए। आसिफ ने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो के नई दिल्ली दौरे के बाद पाकिस्तान में आतंकवाद की स्थिति पर अमेरिका और भारत के साझा बयान का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि दोनों देशों ने पाकिस्तान पर कई आरोप लगाए। इसके बाद भी इमरान द्वारा पत्र में आतंकवाद का जिक्र करना कमजोरी की निशानी है। पीपीपी की उपाध्यक्ष और अमेरिका में पाक की पूर्व राजदूत रह चुकीं शेरी रहमान ने भी बिना तैयारी के कदम उठाने पर इमरान की आलोचना की है।

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