बिना ‘सदर’ की कांग्रेस

राज्य में विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने ही वाली है। राजनीतिक चौसर पर शह और मात देने के लिए भाजपा व कांग्रेस पार्टी ने प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम मुहर की तैयारी कर ली है। ऐसे में पिछले पांच वर्षों से बिजयनगर में कांग्रेस पार्टी का नगर अध्यक्ष का रिक्त पद सियासी गलियारों में चर्चा का विषय है। प्रस्तुत है राजनीतिक परिदृश्य पर खारीतट संदेश की विशेष रिपोर्ट….
बिजयनगर। विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी के साथ कांग्रेस के टिकट के दावेदार माने जाने वाले नेताओं ने कस्बे सहित क्षेत्र का दौरा कर कार्यकर्ताओं का मन टटोलना शुरू कर दिया है। इसके बावजूद सांगठनिक तौर पर कांग्रेस भाजपा से कहीं पीछे नजर आ रही है। कांग्रेस के हालात ऐसे हैं कि मसूदा ब्लॉक अध्यक्ष पद पर इकबाल मंसूरी का मनोनयन तो हो गया लेकिन वे अब अपनी कार्यकारिणी घोषित नहीं कर सके। वहीं बिजयनगर कांग्रेस कमेटी की हालत और भी ज्यादा नाजुक है। यहां बीते पांच साल से नगर कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष पद रिक्त है।

पांच साल पहले पूर्व पार्षद राजेन्द्र शर्मा नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे थे। इसके बाद एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत पूर्व पार्षद ओमप्रकाश माली को पार्टी ने नगर कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई और उस समय रामचन्द्र चौधरी खेमे के पार्षद बृजेश तिवाड़ी व अन्य कार्यकर्ताओं ने माली की नियुक्ति का पुरजोर विरोध किया। इस पर जिला कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर ओमप्रकाश माली ने चौबीस घंटे के भीतर ही अध्यक्ष पद त्याग दिया।

इसके बाद से ही नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पद रिक्त है, ऐसे में कार्यकारिणी की बात तो बिलकुल बेमानी है। पार्टी के कार्यक्रम कस्बे में बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। कस्बे के निष्ठावान कांग्रेस कार्यकर्ताओं को यह टीस भीतर तक साल रही है। इसके बावजूद कस्बे के कांग्रेसी नेताओं की गुटबाजी से भयभीत जिला कांग्रेस कमेटी यहां नगर कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष मनोनीत करने से कतरा रही है। चूंकि अब विधानसभा चुनाव सिर पर है, ऐसे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अध्यक्ष पद को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है।

कार्यकर्ताओं का तर्क है कि नगर कांग्रेस कमेटी में अध्यक्ष और कार्यकारिणी नहीं होने के कारण यहां के नेता पार्टी अनुशासन को ताक में रखकर अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग की तर्ज पर मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं। इससे पार्टी की छवि खराब हो रही है। इसका उदाहरण पिछले दिनों पेट्रोल-डीजल की दरों में वृद्धि के विरोध में कांग्रेस की ओर से आहूत बंद के दौरान भी देखने को मिला।

बंद करवाने के लिए बाजार में कांग्रेस कार्यकर्ता पालिका अध्यक्ष सचिन सांखला व उपाध्यक्ष सहदेवसिंह कुशवाह के नेतृत्व में पार्षदों के साथ निकले। लेकिन जैसे ही कस्बे में बजरंगी चौराहे पर पूर्व विधायक ब्रह्मदेव कुमावत का पदार्पण हुआ तो पालिकाध्यक्ष सांखला कुछ पार्षदों व कार्यकर्ताओं के साथ ब्रह्मदेव कुमावत के साथ हो लिए। वहीं सहदेवसिंह कुशवाह के साथ मौजूद पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने कुमावत के नेतृत्व को चुनौती देते हुए उनके साथ जाने से साफ इनकार कर दिया।

वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ता तरुण कच्छावा ने तो आक्रोश में भरकर यहां तक कह डाला कि भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस में स्थानीय कार्यकर्ता बंद कराने में सक्षम नहीं है क्या? ब्रह्मदेव कुमावत को यदि बंद कराने की इतनी ही चिंता है तो वे सबसे पहले अपने पैतृक गांव बांदनवाड़ा को तो बंद करवाते। कार्यकर्ताओं की गुटबाजी का नतीजा यह रहा कि आम कार्यकर्ता जो जोश-खरोश के साथ बंद कराने निकले थे कुछ ही देर में उनका जोश ठण्डा हो गया। दुकानों के शटर देखते ही देखते धड़ाधड ऊंचे होते गए और बाजार खुल गया।

इस बार कांग्रेस के कार्यकर्ता मसूदा विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की जीत को लेकर अधिक आशान्वित है लेकिन उन्हें यह मलाल साल रहा है कि कहीं सांगठनिक ढांचा मजबूत न होने और पार्टी में गुटबाजी का खमियाजा पार्टी को नहीं भुगतना पड़ जाए।
कच्छावा है प्रबल दावेदार
अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ता तरुण कच्छावा को प्रबल दावेदार माना जा रहा है। कच्छावा के पक्ष में पूर्व में कस्बे के पार्षदों व कार्यकर्ताओं ने पार्टी हाईकमान को पत्र लिखकर कच्छावा की नियुक्ति की मांग की थी।
कर्मठ कार्यकर्ता को बागडोर सौंपी जाए
पार्टी आलाकमान को चाहिए कि कार्यकर्ताओं में एकरूपता बनाए रखने के लिए किसी कर्मठ कार्यकर्ता को बागडोर सौंपी जाए ताकि धरातल पर पार्टी मजबूती के साथ खड़ी दिखे।

-संजय शर्मा, पार्षद
शीघ्र हो जाएगी घोषणा
पार्टी आलाकमान शीघ्र ही नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की नियुक्ति करने जा रहा है। आशा है इसकी घोषणा शीघ्र हो जाएगी। अध्यक्ष के अभाव में पार्टी में गुटबाजी पनप रही है जो ठीक नहीं है।
तरुण कच्छावा, वरिष्ठ कार्यकर्ता, कांग्रेस
जिला व प्रदेश कांग्रेस से लिया जाएगा मार्गदर्शन
नगर अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए किसी एक नाम पर कार्यकर्ताओं में सहमति बनाकर जिला कांग्रेस व प्रदेश कांग्रेस से मार्गदर्शन लिया जाएगा ताकि पार्टी कार्यक्रम प्रभावित न हो।
सहदेवसिंह कुशवाह, उपाध्यक्ष-नगरपालिका बिजयनगर
जरूरी है मनोनयन
विधानसभा चुनाव से पूर्व हर हाल में नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर मनोनयन व कार्यकारिणी का गठन होना आवश्यक है वरना पार्टी के क्रियाकलापों को अंजाम देना मुश्किल हो जाएगा।
ओमप्रकाश माली, पूर्व अध्यक्ष-नगर कांग्रेस कमेटी बिजयनगर
सदर होना ही चाहिए
कस्बे में कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष और उनकी कार्यकारिणी के बिना पार्टी कार्यक्रम को अमलीजामा पहनाना मुश्किल होगा। ऐसे में यहां कांग्रेस सदर होना ही चाहिए।
ज्ञानचन्द चौधरी, अध्यक्ष कांग्रेस सेवा दल, बिजयनगर
स्वच्छ छवि का हो
नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर सब कार्यकर्ताओं को साथ रखने वाले, सर्वमान्य और स्वच्छ छवि व अनुभवी कार्यकर्ता की नियुक्ति होनी चाहिए।
श्याम नागौरी, पूर्व अध्यक्ष-नगर कांग्रेस कमेटी बिजयनगर

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