कबड्डी: आयोजकों को बधाई

आधुनिकता के इस दौर में ग्रामीण-क्षेत्रों में आज भी पारम्परिक खेल और संस्कार सहेजे जा रहे हैं। हार-जीत से इतर बिजयनगर में आयोजित इस कबड्डी प्रतियोगिता के भाग लेने वाले हर खिलाड़ी और आयोजक बधाई के पात्र हैं।
बिजयनगर में ‘कबड्डी’ महज एक खेल नहीं, यह हमारी विरासत भी है। विशुद्ध भारतीय खेल। भारतीय जीवन -शैली का अक्स है कबड्डी। बिजयनगर में कबड्डी प्रतियोगिता को सफल बनाने के लिए आयोजकों की सराहना की जानी चाहिए। सभी इसके लिए बधाई के पात्र हैं। कोई शक नहीं कि नगर पालिका अध्यक्ष सचिन सांखला सहित उनकी पूरी टीम का प्रयास सराहनीय रहा। कुछ चीजें सियासत के चश्में से इतर भी देखने की आदत डालनी चाहिए।

जब खेलों में क्रिकेट सिरमौर हो और बच्चे मौका देखते ही मोबाइल पर या फिर वीडियो गेम में आंखें गड़ाए रहते हैं, ऐसे में बिजयनगर जैसे छोटे शहरों में ‘कबड्डी-कबड्डी’ की गूंज से खिलाडिय़ों को पसीना बहाते देखना मन को सुकून देता है। प्रतियोगिता के आगाज से लेकर समापन समारोह तक एक चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी थी, जिसे आयोजकों ने पूरे उत्साह से बखूबी निभाया। खिलाडिय़ों ने भी अनुशासन और खेल भावना से अपना प्रदर्शन किया। बहुत संभव है कि ग्रामीण क्षेत्रों के ज्यादातर इन खिलाडिय़ों को इतने बड़े आयोजन में पहली बार भाग लेने का अवसर मिला हो। आयोजकों ने भी इन खिलाडिय़ों को कहीं निराश नहीं किया।

चाहे व मैदान हो या फिर खिलाडिय़ों के भोजन की व्यवस्था। हर व्यवस्था माकूल थी। इस आयोजन से यह तो स्पष्ट है कि आधुनिकता के इस दौर में ग्रामीण-क्षेत्रों में आज भी पारम्परिक खेल और संस्कार सहेजे जा रहे हैं। इसलिए हार-जीत से इतर बिजयनगर में आयोजित इस कबड्डी प्रतियोगिता के भाग लेने वाले हर खिलाड़ी बधाई के पात्र हैं। सभी को शुभकामनाएं। जाहिर है, प्रतियोगिता होगी तो किसी को हराकर ही कोई जीतेगा। टीम भावना से खेलना विशेष मायने रखता है।

पुन:श्च बिजयनगर की सरजमी और यहां के लोग शानदार कबड्डी प्रतियोगिता का साक्षी बने। प्रतियोगिता के रूप में ही सही, पारम्परिक खेलों का आयोजन होते रहना चाहिए। एक बार फिर बिजयनगर में कबड्डी प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई। अग्रिम शुभकामनाएं…।

– दिनेश ढाबरिया –

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