शक्ति रूपेण संस्थिता:

हमारे धर्म- संस्कृति व समाज में नारी शक्ति के रूप में पूजनीय रही हैं। नवरात्र में इसी नारी रूपी शक्ति की पूजा-अर्चना-आराधना की जाती है। नारी हर रूप में सदियों से पूजनीय और वंदनीय रही हैं।

शक्ति की देवी की पूजा-अर्चना शुरू हो गई है। हमारे धर्म- संस्कृति व समाज में नारी शक्ति के रूप में पूजनीय रही हैं। नवरात्र में इसी नारी रूपी शक्ति की पूजा-अर्चना-आराधना की जाती है। सच तो यह है कि नारी हर रूप में सदियों से पूजनीय और वंदनीय रही हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं लाकर केन्द्र से लेकर राज्य सरकारें भी सराहनीय प्रयास कर रही है। इसके बावजूद आए दिन बेटियों व महिलाओं के साथ दुराचार की घटनाएं घट रही हैं।

इस पर हर व्यक्ति व हर समाज को गंभीरता से सोचना-विचारना चाहिए। बेटियों व महिलाओं का सम्मान महज नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसकी पहल घर, पड़ोस, मोहल्ले व समाज से शुरू करनी चाहिए। बड़े-बुजुर्ग कहा करते हैं बेटियां दो कुलों की धरोहर होती हैं। इसलिए बेटियां कहीं अधिक सम्माननीय हैं। कोई अतिश्योक्ति नहीं कि बेटियां ‘अनमोल’ होती हैं। सम्मान का प्रतिफल हमेशा सम्मान ही मिलता है। इसलिए सामाजिक संस्कार के तहत ही हम सब का फर्ज है कि अपने घर के बेटों को भी बेटियों व महिलाओं का सम्मान करना सीखाना चाहिए।

यह संस्कार उसे जीवन भर काम आएगा। यह संस्कार किसी भी व्यक्ति को चारीत्रिक पतन से बचाएगा। अपमान का हश्र तो महाभारत में सर्वविदित है। ठीक इसी तरह बेटियां जब पहली बार ससुराल जाती हैं तब वह परिवार व समाज की ‘राजदूत’ की भूमिका में होती हैं। जाहिर है, राजदूत का कार्य बहुत जिम्मेदारीपूर्ण होता है, जिसे जीवन भर मर्यादा में रहकर निभाना पड़ता है। इसी तरह जब वह विवाह के बाद विदेश जाती हैं तब वह परिवार, समाज के साथ-साथ देश की भी राजदूत की भूमिका में होती हैं। वह वहां पर हमारे समाज व देश की सांस्कृतिक राजदूत की भूमिका में होती हैं।

नि:संदेह पाश्चात्य संस्कृति का असर हमारे आधुनिक समाज पर पड़ा है। थोड़ी-बहुत सामाजिक-पारिवारिक ढांचे को टीवी व मोबाइल ने भी बिगाड़ा है। सच है कि ये उपकरण अब जरूरी हो गए हैं। लेकिन इन उपकरणों से कहीं अधिक परिवार का दायित्व है। आइए, इस नवरात्र में बेटियों का सम्मान करने का संकल्प लें।

– दिनेश ढाबरिया –

Leave a Reply

Your email address will not be published.

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Skip to toolbar