देश में रोड सेफ्टी को लेकर एक अलग ऑथोरिटी की जरूरत: राठौड़

बिजयनगर के निकटवर्ती गांव सिंगावल निवासी वीरेन्द्रसिंह राठौड़ भारत सरकार के मुख्य सड़क तकनीकी सलाहकार हैं। केन्द्र सरकार ने एक बार फिर उनका कार्यकाल बढ़ा दिया है। सड़क सुरक्षा के संदर्भ में वे कई यूरोपीय देशों का भ्रमण कर वहां की यातायात व्यवस्था का गहन अध्ययन भी किया है। इन दिनों वीरेन्द्र सिंह राठौड़ ने मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय से सड़क सुरक्षा पर पीएचडी डिग्री भी हासिल की है। प्रस्तुत है वीरेन्द्र सिंह राठौड़ से खारीतट संदेश की विशेष बातचीत….

प्रश्न: सड़क सुरक्षा विधियों पर आपने मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय से पीएचडी की है, खारीतट सन्देश की ओर से आपको बहुत-बहुत बधाई। इस शोध में विशेष क्या है?
उत्तर: जी, धन्यवाद! हमारे देश में जो सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी विभाग अथक प्रयास कर रहे हैं लेकिन उसके बावजूद भी सड़क दुर्घटनाएं नहीं रुक रही हैं। दुर्घटनाओं में जनहानि नहीं थम रही। मैंने यह शोध किया कि हमारे देश में चल रहे वाहनों की डिजायन में क्या चेंज हो, क्या सुरक्षा उपकरण हों जो दुर्घटना को स्वत: रोक लें। अचानक कोई ट्रबल होने पर व्हीकल से व्हीकल में ही संचार हो और दुर्घटना होने से पहले उसे टाला जा सके। कुल मिलाकर इंटेलीजेंस ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम बनाकर एक बड़ा बदलाव लाना है।

इसी संदर्भ में मैंने कुछ शोध कर इन कमियों की जानकारी जुटाई है। दूसरा इंजीनियरिंग ऑफ रोड है। हमारे देश में जितने भी नेशनल हाईवे हैं, वे सुरक्षित नहीं हैं। इन पर होने वाली दुर्घटनाओं के लिए सभी लोग या तो तेज गति या फिर ड्राईवर की गलती बताते हैं। जबकि वास्तविकता तो यह है कि दुर्घटना का सही कारण क्या रहा इसका अनुसंधान करने के लिए हमारे पास समुचित संसाधन भी नहीं है। इन्हीं पहलुओं पर शोध किया है।
प्रश्न: सड़क सुरक्षा को लेकर आपने कई यूरोपीय देशों का भी अध्ययन किया है। भारतीय सड़कों पर क्या खामियां है, और इन खामियों को कैसे दूर किया जा सकता है?
उत्तर: यूरोप जैसे विकसित देशों में हाईवे पर कोड सिस्टम बने हुए हैं और वहां के वाहन उसी कोड के अनुरूप चलते हैं। वहां वाहनों की श्रेणी के अनुसार और उनकी गति के आधार पर सड़कों के कोड है। वहां के वाहन चालकों को पता है कि उन्हें किस लेन में चलना है। वहां के हाईवे दोनों ओर पैक करते हुए सर्विस लेन बनी हुई है। इन देशों में 50 किमी तक होटल, रेस्टोरेंट आदि होते है। प्राय: देखने में आया है कि हमारे देश में 63 प्रतिशत मौतें सड़क दुर्घटनाओं में होती हैं। यहां पर हाईवे सेफ्टी कोड बनाते हुए अलग-अलग लेन बनाकर 100-90-80 और सार्वजनिक परिवहन की गाडिय़ां अलग-अलग लेन में चलनी चाहिए।

यहां तक कि सार्वजनिक परिवहन सेवा को संतोषप्रद, सुविधाजनक व बेहद कम किराये में संचालित करे ताकि देशभर में अनधिकृत परिवहन साधनों बंद हो और लापरवाही की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सके। जब सरकार कम किराये में आमजन के लिए आने-जाने की समुचित व्यवस्था कर दे तो लोग अनावश्यक क्यों अपनी जान जोखिम में डालेंगे। यदि सरकार ऐसा करे तो लोगों के साथ-साथ हाईवे भी सुरक्षित हो जाएंगे। वर्तमान में भारत में प्रत्येक 1 हजार व्यक्ति पर डेढ़ बस की व्यवस्था है, वहीं चीन जैसे देशों में प्रत्येक 1 हजार व्यक्ति पर 6-7 बसें हैं। इसलिए हमें आज की आवश्यकता है कि हम डेढ़ बस से 6-7 बसों तक अग्रसर होना होगा। देश में रोड सेफ्टी को लेकर एक अलग आथोरिटी की जरूरत है।
प्रश्न: किस देश में सड़क सुरक्षा को लेकर सर्वाधिक चेतना है और वहां की विशेषता क्या हैं?
उत्तर: सड़क सुरक्षा को लेकर सर्वाधिक चेतना विकसित राष्ट्रों जैसे यूरोप, अमेरिका आदि में है। वहां के लोग स्वत: ही सड़क सुरक्षा के नियमों को पालन करते हैं। वहां सड़क सुरक्षा कानून इतना प्रभावी है कि उसे कोई तोडऩे का प्रयास तक नहीं करता। वहां जुर्माना अत्यधिक है जबकि हमारे यहां ऐसा नही हैं। वर्तमान में भारत में कई मिशन चल रहे हैं। यहां भी ऐसे मिशन चलाकर सुरक्षित राष्ट्र का लक्ष्य प्राप्त करने की जरूरत है।
प्रश्न: भारत में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सड़कों के निर्माण में तकनीकी खामी है या फिर सख्त कानून की जरूरत है?
उत्तर: हमारे यहां सड़क निर्माण की पॉलिसी सही नहीं है, उसको नया बनाकर लागू करना चाहिए। यदि सड़क पर एक भी खड्ढा रह जाए तो सड़क बनाने वाले को मालूम होना चाहिए कि इस गलती की सजा का प्रावधान या जुर्माने का क्या प्रावधान है। सड़क बनाने वाली कम्पनियों को पता होना चाहिए कि यदि कार्य में कोताही बरती गई तो उनके खिलाफ क्या प्रावधान है। सड़क बनाने वाली कम्पनियों और कार्यों की हर छ: माह में थर्ड पार्टी से ऑडिट होती रहनी चाहिए।
प्रश्न: आपने भारत सरकार को प्राथमिक से उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में सड़क सुरक्षा के बारे में सुझाव दिया है। उन सुझावों में मुख्य बिन्दु क्या हैं?
उत्तर: स्कूली बच्चा रोड पर फ्यूचर का ड्राईवर है तो उसको यह जानकारी होनी चाहिए कि कि उसे सड़क पर कैसे चलना चाहिए। वह वाहन का जब भी उपयोग करे तो कैसे करें। सड़क सुरक्षा के क्या नियम हैं। सड़क पर पैदल या बाइक पर चलते समय किन नियमों का पालन करना जरूरी है। मैंने यह जानकारी सिर्फ स्कूली स्तर ही नहीं, विश्वविद्यालय स्तर तक देने का सुझाव दिया है।
प्रश्न: इन दिनों सड़क सुरक्षा के लिए आप क्या कर रहे हैं?
उत्तर: मैंने स्वयं अपने स्तर पर भी एक योजना चला रखी है जिसके तहत 5 जिलों के 6 जोन बनाकर उन्हें सुरक्षित बनाने का लक्ष्य रखा है। इस प्रयास में मेरे साथ कुछ लोग मिलकर कार्य कर रहे हैं। इसमें मैं स्वैच्छिक रूप से जुड़ा हुआ हूं। हिन्दुस्तान जिंक का इसमें सहयोग हैं। इन पांच सालों में मैंने लगभग 4 लाख लोगों को सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूक किया है।

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