विधिविधान से किया गया भोजनशाला का भूमिपूजन

बिजयनगर। श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ भैरव मंदिर ट्रस्ट राजदरबार सिटी बिजयनगर के तत्वावधान में श्री नाकोड़ा भैरव मंदिर के समीप भोजनशाला के लिए बुधवार को भूमिपूजन व शिलापूजन किया गया। श्री नाकोड़ा भैरव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष योगेन्द्रराज सिंघवी ने बताया कि परम् पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य प्रवर गुरुदेव श्रीमणिप्रभ सूरीश्वरजी महाराज सा. के पावन आशीर्वाद से विधिविधान से भूमिपूजन एव शिल्यान्यास किया गया।

उन्होंने बताया कि विधिकारक संजय छाजेड़ ने बुधवार सुबह छह बजे स्नात्र पूजन के बाद 6.30 बजे भूमिपूजन विधान करवाया। इसके बाद अठारह अभिषेक नवपद एव दशदिकपाल पूजन सम्पन होने पर विजय मुहूर्त 12:39 पर शिला स्थापित की गई। शिलापूजन के साथ ही अतिशीघ्र भोजनशाला निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। विदित है कि श्री नाकोड़ा पाश्र्वनाथ भैरव मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रदालु आस पास के क्षेत्रों व अन्य नगरों से दर्शनार्थ आते हैं व हर रविवार को भक्तों का तांता लगा रहता है। मन्दिर भक्तों की आस्था का केन्द्र बन रहा है। भोजनशाला व धर्मशाला निर्माण से दर्शनार्थियों को सुविधाएं मिलेंगी।

इस दौरान ट्रस्ट के अशोक टिकलिया, पवन बोरदिया, विमल धम्माणी, जितेन्द्र मुणोत, अजय पोखरना, जितेन्द्र छाजेड़, विकास चोरडिय़ा, पुखराज डांगी, संजय बड़ोला, दिलीप मेहता, सुखराज मण्डिया, अंकित लोढ़ा, ज्ञानचन्द खाब्या, अनिल नाबेड़ा, महावीर पामेचा, सुभाष लोढ़ा, सुरेन्द्र नाहर, अंकित सांड, संजय खाब्या, रूपचन्द नाबेड़ा, सम्पतराज बाबेल आदि मौजूद रहे।

प्रश्न: इस भोजनशाला की विशेषता क्या है?
उत्तर: बाहर से पधारने वाले श्रद्धालुओं के लिए न्यूनतम व सात्विक भोजन की व्यवस्था इसी परिसर में हो जाए इसी बात को ध्यान में रखते हुए भोजनशाला का निर्माण कराया जा रहा है। निकट भविष्य में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के अलावा भी जो व्यक्ति भोजन प्राप्त करना चाहते हैं वे भी न्यूनतम दर पर सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
प्रश्न: कितने लोग इस भोजनशाला में एकसाथ भोजन ग्रहण कर सकेंगे?
उत्तर: भोजनशाला में 200 आदमी एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण करने की व्यवस्था होगी। निर्माण उस प्रकार से कराया जाएगा ताकि निकट भविष्य में 500 आदमी एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण कर सकें।
प्रश्न: निर्माण कब तक पूरा होगा और कितना खर्चा होना अनुमानित हैं?
उत्तर: भोजनशाला को निर्माण कार्य एक साल में पूर्ण कर लिया जाएगा। रही बात अनुमानित खर्च की तो उसका अभी तक को निश्चित नहीं है।
प्रश्न: भोजन वितरण की व्यवस्था कैसे रहेगी?
उत्तर: भोजन वितरण की व्यवस्था एकदम चुस्त होगी। सभी को भोजन टेबल कुर्सी पर बैठाकर कराया जाएगा। भोजन बनाने में सभी चीजें गुणवत्तापूर्ण होंगी। भोजन बनाने में इस्तेमाल होने वाले सभी बर्तन स्टीलनेस स्टील के ही होंगे। भोजनशाला का कार्य सम्पादित कराने के लिए अलग-अलग स्टॉफ की व्यवस्था होगी। भोजन का समय जैनधर्मानुसार यानि सूर्यास्त के बाद भोजनशाला बंद रहेगी। (जैसा कि ट्रस्ट अध्यक्ष योगेन्द्रराज सिंघवी ने खारीतट को बताया)

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