आवासीय परिसर में कारोबार का लाइसेंस नहीं तो 48 घंटों में करो सील

नई दिल्ली। दिल्ली में आवासीय परिसरों के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। अदालत ने शुक्रवार को कहा कि जिन आवासीय परिसरों में कारोबार के लिए लाइसेंस नहीं है, उन्हें 48 घंटों के भीतर सील करना चाहिए।

जस्टिस मदन बी लोकुर, एएम खानविलकर और आर सुभाष रेड्डी की खंडपीठ ने कहा कि संपत्ति मालिकों को अग्रिम नोटिस जारी करने में केंद्र के असहयोगात्मक रवैये से सीलिंग में मुश्किल आ सकती है। न्यायमित्र रणजीत कुमार ने गुरुवार को सुझाव दिया था कि आवासीय परिसरों का दुरुपयोग कर रहे लोग यदि 48 घंटे में लाइसेंस न दिखा सकें तो उनकी संपत्तियों को सील कर देना चाहिए। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि दक्षिण दिल्ली इलाके में दक्षिण नगर निगम व भूमि और विकास कार्यालय द्वारा कराए गए सर्वेक्षण की रिपोर्ट दो सप्ताह में तैयार हो जाएगी। केंद्र सरकार के वकील अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एएनएस नाडकर्णी ने बताया कि 2,354 मकानों का सर्वेक्षण किया गया था।

निगरानी समिति ने उनमें 400 मकानों को सील किया था। उनकी सीलिंग खत्म कर दी जानी चाहिए, ताकि उनका सर्वेक्षण किया जा सके। कोर्ट ने कहा कि पहले रिपोर्ट दें उसके बाद मामले को देखेंगे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एलएनडीओ के अधिकारी पेश हुए और बृहस्पतिवार को डिटेल नहीं दिए जाने को लेकर मांफी मांगी। सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा पेश कर केंद्र सरकार के अधिकारी ने बताया कि अंधा मुगल, सराय रोहिल्ला, मोतिया खान और अमर कॉलोनी में 2354 मकानों का सर्वे किया गया है। इन चारों कॉलोनी के रिकॉर्ड पेश किए गए। सर्वे रिपोर्ट दो हफ्ते में पेश कर दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी।

उधर, भाजपा सांसद डॉ. उदित राज ने सीलिंग को लेकर मुंडका में बुलाई गई महापंचायत में कहा कि जिन फैक्ट्रियों में प्रदूषण का काम होता है उन्हें सील करना अलग विषय है, लेकिन जिनसे प्रदूषण नहीं होता है उन्हें इनकी आड़ में सील करना गलत है। यदि सुप्रीम कोर्ट इस पर स्वयं कोई निर्णय नहीं लेगा तो सुप्रीम कोर्ट का घेराव करेंगे। वहीं, फार्महाउस और मोटलों में होने वाले शादी-समारोह को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। इन समारोहों पर मॉनिटरिंग कमेटी ने सवाल उठाया है। कमेटी के मुताबिक, फार्म हाउस तथा मोटलों में नियमों की अनदेखी कर पंडाल के साथ-साथ एयरकंडीशन तक लगाए गए हैं। इससे नाराज कोर्ट ने सवाल उठाया कि फार्महाउस किसके लिए होता है? इस बाबत सुप्रीम कोर्ट ने साउथ एमसीडी को नोटिस जारी कर 15 दिनों में जवाब दाखिल करने को कहा है।

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