दीपोत्सव: क्रेकर पर लगेगा ब्रेकर

हर्ष-उल्लास-उमंग के इस दीपोत्सव पर्व पर पटाखों ने कब अपनी पैठ बना ली, इसका कहीं कोई उल्लेख नहीं है। बिजयनगर में दीपावली के अगले दिन होने वाली आतिशबाजी में एक-दूसरे पर पटाखे फेंकने की कु-प्रथा भी खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। अतिश्योक्ति नहीं कि यह अमानवीय है। खारीतट संदेश ने इस कुप्रथा पर समाज के हर वर्ग के लोगों से राय ली। किसी ने सराहना नहीं की, आप भी नहीं करेंगे। अब तो माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी दो घंटे रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे फोडऩे की इजाजत दी है। इस आदेश की पालना में पुलिस प्रशासन भी सख्त है। अब हमारी जिम्मेदारी है हम दीपावली कैसे मनाएं…

बिजयनगर । दीपावली के अवसर पर माननीय सुप्रीम कोर्ट की ओर से देशभर में मात्र दो घंटे की आतिशबाजी की इजाजत का असर इस बार कस्बे में भी देखने को मिल सकता है। कस्बे में गोवर्धन पूजा के दिन होने वाली जबरदस्त आतिशबाजी इस बार कानूनी रोक के दायरे में आ गई है। इसके चलते कस्बे में कई आतिशबाज युवाओं के मंसूबों पर पुलिस कार्रवाई पानी फेर देगी। बिजयनगर पुलिस ने भी कड़ी चेतावनी जारी करते हुए हिदायत दी है कि हर हाल में कानून की पालना कराई जाएगी एवं नियम विरुद्ध आतिशबाजी करने वालों को इस बार कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

जानकारी के अनुसार कस्बे में हर वर्ष दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा के अवसर पर बापू बाजार, महावीर बाजार, पीपली चौराहा, सथाना बाजार, सब्जी मंडी, नारायण स्कूल का खेल मैदान, शीतला माता गली आदि क्षेत्र में जबरदस्त धमाकेदार आतिशबाजी होती है। हालात यह हो जाते हैं कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। पिछले वर्ष आतिशबाजी में एक युवक गम्भीर रूप से झुलस गया था। इसके अलावा कई युवक जख्मी हो गए थे। हर साल आतिशबाजी के कारण कस्बे के युवा एवं बच्चे झुलसने से जख्मी होते आए है। पुलिस की अत्यधिक सतर्कता के बावजूद कस्बे में आतिशबाजी पर अब तक लगाम नहीं लगी है। बीते वर्षों में पुलिस कई बार कुछ युवकों के खिलाफ कार्रवाई भी कर चुकी है, इसके बावजूद गोवर्धन पूजा पर जबरदस्त आतिशबाजी होती रही है।

लेकिन इस बार देशभर में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आतिशबाजी के लिए सिर्फ दो घंटे की मियाद तय कर देने एवं अत्यधिक धुएं एवं धमाका वाले पटाखों पर रोक के कारण सम्भावना जताई जा रही है कि इस बार कस्बे में जबरदस्त आतिशबाजी नहीं होगी। इस सम्बंध में बिजयनगर थाना प्रभारी भवानीसिंह ने भी चेताया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कस्बे में लागू करवाया जाएगा और जो भी युवा कानून की अवहेलना करेगा उसे कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

गोवर्धन पूजा के दिन होने वाली अत्यधिक आतिशबाजी पर रोक लगनी चाहिए। इससे हमेशा कोई न कोई दुर्घटना का शिकार या मारपीट-झगड़ा जैसा माहौल बन जाता है। इसलिए ऐसी आतिशबाजी हर हाल में रुकनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर कम समय में हुई अत्यधिक आतिशबाजी से वातावरण में वायु व ध्वनि प्रदूषण हो जाता है जिससे बीमार व्यक्ति, बुजुर्ग, छोटे बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रशासन को ऐसी आतिशबाजी को रोकने के लिए सख्ती बरतनी चाहिए।

अर्जुनसिंह कुशवाह, व्यवसायी, बिजयनगर
एक-दूसरे पर पटाखे फेंकना सरासर गलत
पहले के समय में दीपावली के त्यौहार पर पटाखे जलाते थे लेकिन इन दिनों जैसे नहीं। त्यौहार शांति और आपसी भाईचारे से मनाने का होता है। आजकल की युवा पीढ़ी इस त्यौहार पर एक-दूसरे पर पटाखे फेंक कर जिस प्रकार आतिशबाजी करती है वो सरासर गलत है। इस पर प्रशासन द्वारा पाबंदी लगाई जानी चाहिए ताकि आमजन को त्यौहार के अवसर पर इस गलत प्रथा का सामना न करना पड़े।

सोहनलाल तातेड़ ‘दरबार’, अध्यक्ष, श्वे.स्था.जैन श्रावक संघ, बिजयनगर
धन व जन की हानि की आशंका
दीपावली के दूसरे दिन शाम को सथाना बाजार सहित अन्य स्थानों पर होने वाली आतिशबाजी में जिस प्रकार की प्रतिस्पद्र्धा होती है उससे धन हानि तो होती ही है साथ ही जन हानि की आशंका भी बन जाती हैं। ऐसे में सूक्ष्म जीव, पक्षी, वृद्धजन सहित छोटे बच्चों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि इस आतिशबाजी की प्रतिस्पद्र्धा के साथ सख्ती से पेश आए ताकि आमजन का त्यौहार शांति से मन सके।

निशा जांगिड़, छात्रा
भय का माहौल बन जाता है…
दीपावली पूजन के दूसरे दिन होने वाली खतरनाक आतिशबाजी से धन की हानी तो होती ही है साथ ही जन हानि भी हो जाती है। यहां जब आतिशबाजी शुरू होते ही कोई भी व्यक्ति किसी परिचित के यहां राम-राम करने तक नहीं जा पाता। भय का माहौल बन जाता है। प्रशासन को चाहिए कि इस आतिशबाजी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।

चन्द्रकला पोखरना, समाजसेवी, बिजयनगर
गलत प्रथा पर सख्ती से पाबंदी जरूरी
गोवर्धन पूजा के दिन शाम को होने वाली प्रतिस्पद्र्धा वाली आतिशबाजी बहुत ही गलत प्रथा है। पहले यह आतिशबाजी कम होती थी लेकिन इन तीन चार वर्षों में बढ़ोतरी हो गई हैं। जिस समय यह आतिशबाजी शुरू होती है तब उस स्थान से कोई वृद्ध, महिला, बच्चा नहीं गुजर पाता है। तीन-चार घंटे तक माहौल एकदम भयावह हो जाता हैं। मुझे याद है एक बार एक महिला के कपड़े में पटाखे की चिंगारी जा लगी। ऐसी आतिशबाजी से वातावरण भी दूषित होता है और जान-माल का भी नुकसान होता है। प्रशासन से आशा करता हूं कि इस गलत परम्परा पर सख्ती के साथ पाबंदी लगावें।

शिवदयाल त्रिपाठी, समाजसेवी, बिजयनगर
कानून तोडऩे वालों पर होगी कार्रवाई
माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक कस्बे में सिर्फ निर्धारित दो घंटे की आतिशबाजी ही होगी और इसमें भी प्रतिबंधित पटाखों की आतिशबाजी नहीं होगी, जो भी युवा कानून तोड़ेगा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भवानीसिंह, थानाप्रभारी, बिजयनगर

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