कार्तिक शुक्ल दूज को बहिन के घर पहुंचे थे यमराज

पं. रामगोपाल शर्मा। यमराज के एक बहिन थी उसका नाम जमुना था। दोनों भाई-बहिन में बड़ा प्रेम और स्नेह था। यमराज अपने कार्य में व्यस्त रहते थे। इसलिए बहिन से मिलना नहीं होता था। बहिन बार-बार आग्रह करती थी। भईया मिलने भी नहीं आते हो। यमराज सदैव कार्य में व्यस्त होने की बात कह देते थे। एक दिन बिना सूचना के ही यमराज बहिन से मिलने चले गए। बहिन भाई को आता देखकर बहुत प्रसन्न हुई। उनका कुमकुम व अक्षत से अभिवादन किया। अनेक प्रकार के व्यंजन बनाकर उन्हें प्रेम से भोजन कराया यमराज ने कहा कि आज के दिन जो भाई अपनी बहिन से मिलने के लिए उसके घर जाएगा और भोजन करेगा तो उसकी अकाल मृत्यु नहीं होगी।

उस दिन जितने भी प्राणी नरक में थे उनके सभी पाप नष्ट हो गए और नरक से मुक्त हो गए। यमराज ने फिर कहा कि आज के दिन अपरान्ह पूर्व जो भी प्राणी यमुना नदी में स्नान करेगा उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे, उसको मोक्ष प्राप्त होगा, यह मेरा वरदान है। यमराज जिस दिन बहिन के घर गए उस दिन कार्तिक शुक्ल दूज थी। अत: इसे भाईदूज अथवा यम द्वितिया भी कहते हैं। इस दिन कायस्थ समाज के लोग चित्रगुप्त की पूजा करते हैं। चित्रगुप्त यमराज के लेखाकार है। अत: भाईदूज का बड़ा महत्व है।

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