पत्रकारिता की विश्वसनीयता बरकरार रखना सबसे बड़ी चुनौती: जेटली

  • Devendra
  • 16/11/2018
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नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि एक स्वतंत्र समाज में पत्रकारों के काम की विश्वसनीयता बरकरार रखना मीडिया के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है। श्री जेटली ने यहां 52वें राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर भारतीय प्रेस परिषद के पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्टता के पुरस्कार प्रदान करने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारों को सम्मानजनक वेतन और काम के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनके काम की विश्वसनीयता बरकरार रखना भी मीडिया के लिए प्रमुख चुनौती है।

भारतीय प्रेस परिषद ने वर्ष 2018 के लिए प्रतिष्ठित राजा राममोहन राय अवॉर्ड के लिए अंग्रेजी दैनिक दि हिन्दू के पूर्व प्रधान संपादक एन. राम को चुना है। श्री जेटली से उन्हें यह अवॉर्ड प्रदान किया। देशबंधु भोपाल की मुख्य संवाददाता रूबी सरकार और मराठी दैनिक पुढ़ारी के राजेश परशुराम जोष्टे को ग्रामीण पत्रकारिता का पुरस्कार दिया गया। जबकि विकास पत्रकारिता का अवॉर्ड केरल कौमुदी के उप संपादक वी एस राजेश को दिया गया। फोटा पत्रकारिता के लिए राष्ट्रीय सहारा के सुभाष पॉल और पंजाब केसरी के मिहिर सिंह तथा कार्टून के लिए नव तेलंगाना के लिए श्री पी नरसिंह को पुरस्कार दिया। श्री जेटली ने कहा कि मीडिया के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी ने बहुत से नये आयाम जोड़ दिये हैं। मीडिया के बहुविध माध्यमों की उपलब्धता के कारण प्रत्येक राजनीतिक विचार को मीडिया में जगह मिली हुई है। इतने विकल्प होने के कारण आज कोई यह शिकायत नहीं कर सकता है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी खतरे में हैं और उसे मीडिया में स्थान नहीं मिलता है।

उन्होंने कहा कि बहुत से लोग कहते हैं कि आज आपातकाल है लेकिन वह कहना चाहते हैं कि हम उस दौर से बहुत अागे निकल आये हैं। अगर आपातकाल फिर से लगाया जाये तो वह टिक नहीं पाएगा क्योंकि आपातकाल की ताकत प्रेस पर अंकुश में निहित है और तकनीक प्रेस पर प्रतिबंध या अंकुश लगाने में असमर्थ बनाती है। इससे पहले प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति चंद्रमौलि कुमार प्रसाद ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि प्रेस परिषद ने मर्यादित, तथ्यपूर्ण एवं सही पत्रकारिता सुनिश्चित करने के लिए अनेक कदम उठाये हैं। प्रेस परिषद फर्जी खबरों और धन देकर गलत मकसद से फैलायी जा रही खबरों की चुनौती से मुकाबला करने के लिए सजग है लेकिन मीडिया के सदस्यों के मौलिक अधिकारों का बड़े पैमाने पर हनन किया जा रहा है।

न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा कि अखबार और चैनल पत्रकारों को पर्याप्त वेतन नहीं देते जिससे उन्हें येन केन प्रकारेण कहीं ना कहीं से कमाना पड़ रहा है। अधिकतर मामलों में यह कमाई ईमानदारी की नहीं होती है। पत्रकार केवल अपने पेशे से गरिमा हासिल नहीं कर सकते, उन्हें अच्छा जीवन स्तर बनाये रखने के लिए समुचित वेतन चाहिए। श्रमजीवी पत्रकार कानून का पालन कम, उल्लंघन ज्यादा हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह समझना बहुत जरूरी है कि पत्रकार एक मनुष्य भी होता है। उसकी सुरक्षा और उसके अधिकारों का सम्मान बहुत आवश्यक है तभी मीडिया लोकतंत्र का सार्थक एवं सशक्त चौथा स्तंभ बन सकता है।

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