पहाड़िया के मकान में अतिक्रमण पाये जाने पर नगर निगम उसे हटाए

जयपुर। (वार्ता)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया के हाउसिंग बोर्ड के मकान सम्बन्धी सताईस साल पुराने मामले में अतिक्रमण पाये जाने पर उसे हटाने के निर्देश दिये हैं।
न्यायालय के न्यायाधीश के एस झवेरी और वी के व्यास की खण्डपीठ ने यह आदेश श्री पहाड़िया के पड़ौसी डॉ रामबाबू गोयल की याचिका का निपटारा करते हुए दिए हैं। न्यायालय ने जयपुर नगर निगम को निर्देश दिया है कि वह राजस्थान हाउसिंग बोर्ड को नोटिस देकर जानकारी ले कि उसने अतिरिक्त जमीन आवंटित की है या नहीं। यदि नगर निगम को नापजोख में यह पता लगे कि जगन्नाथ पहाड़िया ने अधिक जमीन पर कब्जा कर रखा है तो उसे तीन महीने के अन्दर कानूनी कार्रवाई कर हटाया जाये।
उल्लेखनीय है कि श्री पहाड़िया को हाउसिंग बोर्ड ने 1987-88 में जवाहर नगर में कॉर्नर का मकान आवंटित किया था। मकान के उत्तर एवं पश्चिम दिशा में 125 वर्गमीटर जगह सुविधा क्षेत्र की खाली थी। इस जमीन में से सीवरेज एवं बिजली तथा अन्य लाइनें जा रही थी लेकिन आवंटी ने इस जमीन पर दीवारें बनाकर इसे अपने मकान में शामिल कर लिया।
मकान के पास फ्लैट्स में रहने वाले डॉ रामबाबू गोयल ने इसकी शिकायत जयपुर नगर निगम एवं हाउसिंग बोर्ड में की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर प्रार्थी ने 1990 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की लेकिन वर्ष 2007 में एकलपीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि उसने नगर निगम को कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन नहीं दिया है। प्रार्थी गोयल ने एकलपीठ के इस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी थी।

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