कारोबारियों के लिए बड़ी दिक्कत बने सिक्के, साल दौरान संख्या 40 फीसदी बढी

नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जुलाई में एक परिपत्र जारी कर बैंकों में सिक्कों के रूप में जमाओं की अधिकतम सीमा 1,000 रुपए तय की थी। इससे उन कारोबारियों के लिए बड़ी दिक्कत पैदा हो गई है, जिनके पास बड़ी मात्रा में सिक्के हैं। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक ज्यादा समस्या 10 रुपए के सिक्कों की वजह से है। पिछले एक साल के दौरान इन सिक्कों की अर्थ तंत्र में उपलब्धता मूल्य के हिसाब से करीब 40 फीसदी बढ़ गई है।

बैंकों के पास पहले से नकदी रखने में किल्लत
बैंकों के पास पहले से ही नकदी रखने के लिए जगह की भारी किल्लत है। इसलिए वे जागरूकता अभियान चलाकर कारोबारियों को सिक्के स्वीकार करने के लिए राजी कर रहे हैं। पहले बैंक किसी भी शाखा में कुल जमा का 10 फीसदी हिस्सा सिक्कों के रूप में स्वीकार कर लेते थे लेकिन नोटबंदी के बाद इनकी उपलब्धता ज्यादा हो गई है।

वहीं नोटबंदी के कारण बैंकों की तिजोरियां भरी पड़ी हैं और उनके पास जगह की किल्लत है। यही वजह है कि आरबीआई ने परिपत्र जारी कर 1 रुपए या उससे अधिक मूल्य के सिक्कों के रूप में दैनिक जमा की सीमा अधिकतम 1,000 रुपए तय की थी। इस परिपत्र के मुताबिक 50 पैसे के सिक्के अधिकतम 10 रुपए तक ही जमा किए जा सकते थे।

1 रुपए का सिक्का बना मुसीबत
कानपुर में भी बैंकों की लापरवाही आम ग्राहकों के लिए मुश्किलों का सबब बन गई है। यहां के बैंकों ने एक रुपए के सिक्के लेने से मना कर दिया है, जिसके बाद व्यापारी आम ग्राहकों से एक का सिक्का नहीं ले रहे हैं। दूसरी तरफ व्यापारियों के पास भी बड़े पैमाने पर सिक्के जमा हो गए हैं। बैंकों ने अब तक 10 रुपये के सिक्के पर स्थिति स्पष्टï नहीं की है और अब 1 रुपये के सिक्के स्वीकार नहीं होने से व्यापरियों की परेशानी और बढ़ गई है। व्यापारी जब बैंकों में सिक्के जमा करने गए तो वहां कर्मचारियों ने इन्हें लेने से मना कर दिया।

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