दक्षिण अफ्रीका में भारतीय राजनयिक के घर डकैती का प्रयास

डरबन/ नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका के शहर डरबन में गुरुवार को दिनदहाड़े आठ डाकुओं ने भारतीय महावाणिज्य दूत डॉ. शशांक विक्रम के निवास पर धावा बोलकर उनके पांच वर्षीय पुत्र को बंदूक की नोक पर लेकर पैसे एवं सोना देने की मांग की।

इस घटना से दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले राजनयिक समुदाय में दहशत फैल गयी है।
हालांकि इस घटना में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार गुरुवार को दोपहर में आठ सशस्त्र डाकू इंडिया हाउस में किसी तरह से घुस आये।
अति विशिष्ट लोगों को सुरक्षा देने वाली एजेंसी एसएपीएस, एक निजी सुरक्षा कंपनी एवं एक निजी सशस्त्र गार्ड की सुरक्षा के बावजूद ऐसा होने पर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार करीब चार बजे आठ हमलावर एक गार्ड को दबोचने के बाद घर के अंदर घुस आए।
श्री विक्रम की पत्नी डॉ. मेघा सिंह और उनके दो बच्चे उस समय घर में थे।
छोटा बेटा रिसेप्शन रूम में एक ट्यूटर के साथ बैठा पढ़ रहा था जिसे लुटेरों ने बंदूक की नोक पर बंधक बना लिया और घरेलू नौकरानी से सुरक्षा अलार्म को निष्क्रिय करवा दिया जिसे उसनें बजा दिया था।
लुटेरों ने इसके लिये नौकरानी से मारपीट भी की।
लुटेरों ने पूरे घर को लोहे की छड़ों से तहस नहस कर दिया।
लुटेरे अलमारी, लॉकर का पता पूछ रहे थे और पैसे, सोना और आभूषण देने की मांग कर रहे थे।

डॉ. सिंह अपने दस वर्षीय बड़े पुत्र के साथ ऊपरी मंजिल में स्थित कमरे में टेलीविजन देख रहीं थीं।
उन्होंने नीचे से आ रहीं अजीबोगरीब आवाज़ों के बीच नौकरानी के चीखने की आवाज़ सुनी तो वह सीढ़ियों की ओर बढ़ी जहां अपने छोटे पुत्र को लुटेरों के हाथों बंधक देख उनके पसीने छूट गये।
उन्होंने हालात देख कर सीढ़ियों पर बने सुरक्षाद्वार को तेजी से बंद कर दिया लेकिन एक लुटेरे से लाेहे की छड़ से उसे तोड़ने की कोशिश की।
इसबीच उन्होंने अपने पति को खबर कर दी।
अलार्म बजने के 15 मिनट बाद जब पुलिस एवं सुरक्षा बल पहुंचे तो लुटेरे रसोई की खिड़की से भाग निकले।

इस घटना से श्री विक्रम एवं उनका पूरा परिवार हतप्रभ है।
उन्होंने कहा कि डरबन उनके लिये घर जैसा है और वे यहां बहुत सुकून से रहते आए हैं।
उन्हें कतई उम्मीद नहीं थी कि उनके साथ ऐसा भी हो सकता है।
यह पहली बार हुआ है कि इंडिया हाउस में डाकू घुसने में कामयाब हो पाये।

इस घटना को लेकर तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं।
सुरक्षा बलों की ओर से लापरवाही की भी बात कही जा रही है।
डॉ. सिंह ने कहा है कि वे पल उनके लिये बेहद दहशत भरे थे।
श्री विक्रम ने कहा कि भगवान की दया से हम लोग बच गये।
इसबीच सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है।
उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने वाली कंपनी की प्रमुख ली एन्न वेस्टन ने कहा कि उनके लिये यह दुख की बात है कि उनका देश उन्हें सुरक्षित रखने में कामयाब नहीं रहा। नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है।

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